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May 3, 2026

हिमाचल : मोटरसाइकिल की टक्कर से महिला की मौ.त, पति को मिला 17 लाख का मुआवजा

बेटी के साथ जा रही थी महिला, टक्कर मार भागा मोटरसाइकिल सवार

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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण MST ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाली महिला के परिजनों को बड़ी राहत दी है।

हादसे में महिला की मौत

अधिकरण ने मृतका के परिवार को 17,77,800 रुपये मुआवजा देने का आदेश जारी किया है। अधिकरण के पीठासीन अधिकारी ने अपने निर्णय में वाहन चालक और मालिक दोनों को संयुक्त रूप से इस राशि का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

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क्या है पूरा मामला?

यह मामला 7 अप्रैल 2021 का है- जब बल्ह उपमंडल के मुंदडू गांव की रहने वाली मीना देवी अपनी बेटी और एक अन्य बच्ची के साथ घर का सामान लेकर लौट रही थीं। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार में आई एक मोटरसाइकिल ने उन्हें टक्कर मार दी।

बेटी के साथ गई थी महिला

हादसा इतना गंभीर था कि मीना देवी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आरोपी चालक दुर्घटना के बाद फरार हो गया था। इसके बाद मृतका के पति सुरेंद्र सिंह ने न्याय के लिए अधिकरण में याचिका दायर कर मुआवजे की मांग की।

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मोटरससाइकिल ने मारी टक्कर

सुनवाई के दौरान मोटरसाइकिल के पूर्व मालिक ने यह दलील दी कि उसने दुर्घटना से पहले ही वाहन किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया था। हालांकि, अधिकरण ने इस तर्क को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक वाहन का पंजीकरण (आरसी) आधिकारिक रूप से स्थानांतरित नहीं होता- तब तक पंजीकृत मालिक भी कानूनी रूप से जिम्मेदार माना जाता है।

परिवार को मिला 17.17 लाख मुआवजा

अदालत ने मृतका की आयु, परिवार की आर्थिक निर्भरता और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कुल 17,77,800 रुपये का मुआवजा तय किया। साथ ही, इस राशि पर याचिका दायर करने की तिथि से 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने का आदेश दिया गया है।

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दो बच्चों से छिन गई मां

मुआवजे की राशि के वितरण को लेकर भी अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कुल राशि में से 40 प्रतिशत हिस्सा पति को दिया जाएगा, जबकि दोनों नाबालिग बच्चों को 30-30 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। बच्चों के हिस्से की राशि उनके बालिग होने तक बैंक में सुरक्षित जमा रखी जाएगी- ताकि भविष्य में उनकी जरूरतों को पूरा किया जा सके।

पीड़ित परिवार को मिला हक

इस फैसले को सड़क दुर्घटना पीड़ित परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है,-ट जिसमें अदालत ने जिम्मेदारी तय करते हुए पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने का प्रयास किया है।

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