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March 29, 2026
सेवा में, यमराज जी... देश भर से भरमौर में धर्मराज को चिट्ठियां भेज रहे लोग; जता रहे कई इच्छाएं
हिमाचल के भरमौर में स्थित है दुनिया का इकलौता धर्मराज का मंदिर
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भरमौर (चंबा)। देवभूमि हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक भरमौर स्थित चौरासी मंदिर परिसर में इन दिनों आस्था का एक अनोखा रूप देखने को मिल रहा है। यहां विराजमान दुनिया के इकलौते धर्मराज मंदिर में अब श्रद्धालु सिर्फ माथा टेकने ही नहीं, बल्कि चिट्ठियों के माध्यम से भी अपनी हाजिरी लगा रहे हैं। देश के अलग.अलग राज्यों से भेजी जा रही ये चिट्ठियां मंदिर में चर्चा का विषय बन गई हैं और लोगों की गहरी श्रद्धा को एक नई अभिव्यक्ति दे रही हैं।
बताया जा रहा है कि हाल ही में छत्तीसगढ़ दिल्ली और झारखंड सहित कई राज्यों से भगवान धर्मराज के नाम पत्र पहुंचे हैं। इन पत्रों में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं] जीवन की परेशानियां और भावनाएं शब्दों में पिरोकर सीधे धर्मराज के दरबार तक पहुंचा रहे हैं। मंदिर के पुजारियों के अनुसार इस तरह की परंपरा पहले भी रही है] लेकिन हाल के दिनों में चिट्ठियों की संख्या और उनमें लिखी भावनाओं ने सभी का ध्यान खींचा है।
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छत्तीसगढ़ से पहुंचे एक पत्र ने विशेष रूप से लोगों को भावुक कर दिया। इस पत्र में एक श्रद्धालु ने खुद को धर्मराज का अनुज और शनिदेव का भक्त बताते हुए अपनी आर्थिक तंगी का जिक्र किया है। उसने लिखा कि वह स्वयं मंदिर आकर दर्शन करने में असमर्थ है, इसलिए अपनी अर्जी पत्र के माध्यम से भेज रहा है।
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पत्र में उसने कई अनोखी और गहरी इच्छाएं जताई हैं—जैसे गंभीर बीमारियों से मुक्ति, जीवन के अंतिम समय में बिना कष्ट मृत्यु, 100 वर्ष से अधिक आयु, पुनर्जन्म केवल भारत में होना, अगले जन्म में भी पिछले जन्म की स्मृति बनी रहना, गरीब परिवार में जन्म लेकर माता-पिता का सानिध्य प्राप्त करना और परिवार के लिए शिक्षा व सुख-समृद्धि की कामना।

मंदिर के पुजारियों ने इन चिट्ठियों को केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं का प्रतीक मानते हुए उनके नाम से विशेष पूजा-अर्चना की है। पुजारियों का कहना है कि श्रद्धालु भगवान से जुड़ने के लिए अलग-अलग माध्यम अपनाते हैं और चिट्ठियों के जरिए अपनी बात रखना भी उसी आस्था का एक अनोखा रूप है।
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छठी शताब्दी से पूर्व स्थापित चौरासी मंदिर समूह में स्थित धर्मराज मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बेहद खास है। मान्यता है कि यहां धर्मराज शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं और यही कारण है कि इसे दुनिया का इकलौता धर्मराज मंदिर माना जाता है। मणिमहेश यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु भी यहां माथा टेकना शुभ मानते हैं।
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स्थानीय लोगों के अनुसार, आज के डिजिटल दौर में भी श्रद्धालुओं का यह भावनात्मक जुड़ाव दर्शाता है कि विश्वास के सामने दूरी कोई मायने नहीं रखती। अब लोग सिर्फ मंदिर पहुंचकर ही नहीं, बल्कि डाक के जरिए भी अपनी फरियाद सीधे भगवान तक पहुंचाने लगे हैं। इन चिट्ठियों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आस्था केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि वह एक ऐसा भाव है जो इंसान को हर परिस्थिति में ईश्वर से जोड़े रखता है—चाहे वह दूरी कितनी भी क्यों न हो।