#विविध
December 23, 2025
मंडी शिवरात्रि महोत्सव में सिर्फ हिमाचली कलाकार और कांगड़ा कार्निवल में पंजाबी स्टारनाईट
मंडी में बाहरी कलाकारों से किनारा
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मंडी/कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश ने अपनी संस्कृति की छाप पूरे विश्व भर में छोड़ी है। जिसके चलते प्रदेश को पूरी दुनिया में सराहा जाता है। मगर ताजा मामला हिमाचल प्रदेश में सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर दो अलग-अलग फैसलों को लेकर सामने आई चर्चा का है। जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव मंडी में जहां केवल हिमाचल के कलाकारों को ही मंच देने का निर्णय लिया गया है, वहीं दूसरी ओर कांगड़ा वैली कार्निवाल में पंजाबी और बॉलीवुड कलाकार आकर्षण का केंद्र बनाए गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंडी में आज यानी मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव मेला समिति की सामान्य बैठक आयोजित की गई। डीसी मंडी की मौजूदगी में हुई इस बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि, इस वर्ष शिवरात्रि महोत्सव की सांस्कृतिक संध्याओं में किसी भी अन्य राज्य के कलाकार को आमंत्रित नहीं किया जाएगा। सभी स्टार नाइट्स में केवल हिमाचली लोक कलाकार, गायक और सांस्कृतिक दल ही प्रस्तुति देंगे।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे धर्मपुर विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि, आपदा के कठिन समय में हिमाचल के कलाकारों ने प्रदेश के लोगों के साथ खड़े रहकर हरसंभव सहयोग किया। ऐसे में प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि इस बार बाहरी कलाकारों के बजाय प्रदेश की अपनी लोक संस्कृति और कलाकारों को प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना था कि यह फैसला हिमाचली संस्कृति को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
दूसरी ओर, कांगड़ा जिले के धर्मशाला में 24 से 31 दिसंबर तक कांगड़ा वैली कार्निवाल का आयोजन किया जा रहा है। प्रशासन ने इस आयोजन के लिए कलाकारों को अंतिम रूप दे दिया है। भाजपा नेताओं और आम जनता के विरोध के बाद प्रशासन ने कार्निवाल के लिए अंशदान न लेने का फैसला भी किया है। कार्निवाल के दौरान आठ सांस्कृतिक संध्याएं आयोजित होंगी, जिनमें पंजाबी गायक बब्बू मान, बॉलीवुड सिंगर अंकित तिवारी और सूफी गायक कंवर ग्रेवाल मुख्य आकर्षण रहेंगे।
इसके साथ ही ड्रोन शो, क्रिकेट और फुटबॉल प्रतियोगिताएं, स्ट्रीट थिएटर, आतिशबाजी शो और मैराथन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने विभिन्न कमेटियों का गठन कर तैयारियां तेज कर दी हैं।
कांगड़ा कार्निवल को लेकर प्रशासन का तर्क है कि ऐसे कार्यक्रमों में स्टार नाइट का उद्देश्य युवाओं को आकर्षित करना और पर्यटन को बढ़ावा देना होता है। बाहरी कलाकारों की मौजूदगी से भीड़ बढ़ती है और आयोजन को व्यापक पहचान मिलती है। हालांकि इसके बावजूद सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रदेश की पहचान को मजबूत करने के लिए हिमाचली कलाकार ही सबसे बड़ा माध्यम नहीं हो सकते।
सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को सभी जिलों में आयोजनों के लिए एक स्पष्ट और समान नीति बनानी चाहिए। यदि लक्ष्य स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देना है, तो यह नीति हर जिले में समान रूप से लागू होनी चाहिए। वहीं यदि पर्यटन और मनोरंजन के नाम पर बाहरी कलाकारों को बुलाया जाता है, तो स्थानीय कलाकारों को भी समान मंच और अवसर दिया जाना जरूरी है।
बहरहाल, मंडी शिवरात्रि महोत्सव और कांगड़ा कार्निवल का यह अंतर अब केवल आयोजनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सवाल बन गया है कि हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान को आगे ले जाने की दिशा आखिर तय कौन कर रहा है।