#अपराध
September 17, 2026
हिमाचल में 10 करोड़ की ठगी- पैसे लेकर नेपाल भागा शातिर, बड़े लोगों को लगाया चूना
आइआइटी मंडी से जुड़े लोगों के निवेश की भी चर्चा
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में ऑनलाइन ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि महाराष्ट्र निवासी अनिल गौरव धोते ने आइआइटी मंडी से जुड़े कुछ लोगों समेत स्थानीय निवेशकों से 10 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई और बाद में पैसे लेकर नेपाल चला गया। पधर पुलिस ने एक निवेशक की शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दरअसल, आरोपित ने खुद को ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश का जानकार बताकर लोगों को अपने संपर्क में लिया। निवेशकों को कथित तौर पर हर महीने पांच से दस प्रतिशत तक रिटर्न और इसके अलावा अच्छा खासा मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाया गया। शुरुआत में कुछ निवेशकों को रकम पर रिटर्न दिए जाने की बात सामने आई है। इससे लोगों का विश्वास आरोपित पर बढ़ता गया। इसके बाद कई लोगों ने बड़ी रकम उसके बताए तरीके से ट्रेडिंग में लगा दी।
मामले में आइआइटी मंडी के कुछ फैकल्टी सदस्यों और कर्मचारियों के भी निवेश करने की बात सामने आ रही है। हालांकि, अभी तक संस्थान से जुड़े इन लोगों की ओर से पुलिस में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज करवाए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कुल कितने लोगों ने आरोपित के पास पैसा लगाया था और अलग-अलग निवेशकों से कितनी रकम ली गई।
बताया जा रहा है कि मामले की जानकारी उस समय सामने आई जब पधर क्षेत्र के एक व्यक्ति ने जनवरी में पुलिस से संपर्क कर 35 लाख रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी की शिकायत दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर कथित तौर पर ऐसे अन्य लोग भी सामने आए जिन्होंने आरोपित के पास बड़ी रकम निवेश की थी। अलग-अलग शिकायतों और सामने आई जानकारियों को जोड़ने पर कथित ठगी की रकम 10 करोड़ रुपये से अधिक होने की बात कही जा रही है।
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि आरोपित अनिल गौरव धोते को आइआइटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा के साथ कुछ आधिकारिक और गैर-आधिकारिक कार्यक्रमों में देखे जाने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में संस्थान के निदेशक के साथ उसकी मौजूदगी से कुछ निवेशकों के बीच उसके प्रति भरोसा और मजबूत हुआ। हालांकि, किसी व्यक्ति के साथ सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आना अपने आप में किसी वित्तीय लेन-देन या कथित ठगी में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है।
इस मामले में एक निवेशक की स्थिति विशेष रूप से सामने आई है। बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति ने कारोबार के लिए बैंक से करीब 50 लाख रुपये का ऋण लिया था। बाद में कथित तौर पर अधिक मुनाफे के लालच में उसने यह रकम ट्रेडिंग में लगा दी। अब निवेश की रकम फंसने के बाद व्यक्ति को बैंक ऋण की किस्त और ब्याज चुकाने की चिंता का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे अन्य निवेशकों की आर्थिक स्थिति का भी पुलिस द्वारा पता लगाया जा रहा है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निवेशकों से पैसा लेने के बाद अनिल गौरव धोते नेपाल चला गया। पुलिस अब उसके संभावित ठिकानों और देश से बाहर जाने से संबंधित तथ्यों की जांच कर रही है। जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि निवेशकों से प्राप्त रकम किन बैंक खातों में गई, उसका इस्तेमाल कहां हुआ और क्या इस पूरे मामले में अन्य लोग भी किसी स्तर पर जुड़े हुए थे।
वहीं, आइआइटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा के बारे में बताया जा रहा है कि वह फिलहाल राज्य से बाहर हैं और उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ है। इस कारण मामले को लेकर उनकी तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आ सकी है। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित निवेश योजना किस तरह संचालित की गई, कितने लोगों से रकम ली गई और 10 करोड़ रुपये से अधिक की बताई जा रही राशि का वास्तविक वित्तीय रिकॉर्ड क्या है।
फिलहाल मामला धोखाधड़ी के आरोपों और निवेशकों की शिकायतों के आधार पर जांच के चरण में है। पुलिस बैंक लेन-देन, निवेश से संबंधित दस्तावेज, आरोपित के संपर्कों और अन्य शिकायतकर्ताओं से मिली जानकारी को जांच का हिस्सा बना सकती है। ऐसे मामलों में शुरुआती तौर पर बताए जा रहे निवेश और ठगी के आंकड़े जांच के दौरान बदल भी सकते हैं। इसलिए कुल नुकसान और मामले में शामिल लोगों की वास्तविक संख्या की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।