#विविध

April 6, 2026

सुक्खू सरकार ने युवाओं को दिया धोखा! 55 पदों पर रिटायर्ड प्रोफेसरों के मांगे आवेदन; 2.50 लाख वेतन

युवाओं की अनदेखी कर सुक्खू सरकार रिटायर्ड लोगों को दोबारा दे रही नौकरी

शेयर करें:

sukhu govt job news

शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के नाम पर एक बड़ा फैसला सामने आया है, जिसने नई भर्ती की उम्मीद लगाए बैठे युवाओं के बीच चर्चा छेड़ दी है। सुक्खू सरकार ने प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में खाली पदों को भरने के लिए 55 सेवानिवृत्त प्रोफेसरों को दोबारा तैनात करने की तैयारी की है। खास बात यह है कि सरकार ने नई भर्तियां निकालने के बजाय अनुभवी लेकिन रिटायर्ड हो चुके डॉक्टरों पर भरोसा जताया है।

रिटायर्ड प्रोफेसरों से मांगे आवेदन

हैरानी की बात यह है कि सुक्खू सरकार एक तरफ जहां आर्थिक संकट का रोना रोती है, वहीं दूसरी तरफ सरकार इन रिटायर्ड प्रोफेसरों को भारी भरकम वेतन देने जा रही है। 55 पदों पर की जा रही रिटायर्ड प्रोफेसरों की भर्ती के बाद उन्हें प्रतिमाह सरकार 2.50 लाख का मोटा वेतन देगी।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल पंचायत चुनाव: सबसे बड़े जिला का रोस्टर जारी, 50 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित

4 मेडिकल कॉलेजों में 55 रिटायर्ड प्रोफेसर होंगे भर्ती

जानकारी के अनुसार हमीरपुर] नेरचौक] नाहन और चंबा मेडिकल कॉलेजों में कुल 55 प्रोफेसरों की नियुक्ति की जाएगी। इनमें नेरचौक में सबसे अधिक 16, हमीरपुर में 15 और नाहन व चंबा में 12-12 पद भरे जाएंगे। इन नियुक्तियों के लिए केवल सेवानिवृत्त प्रोफेसरों से ही आवेदन मांगे गए हैं, जिससे यह साफ है कि सरकार फिलहाल युवाओं की नई भर्ती के बजाय पुराने अनुभवी हाथों को ही प्राथमिकता दे रही है।

2.50 लाख प्रतिमाह मिलेगा वेतन

इस फैसले की सबसे अहम बात यह है कि इन रिटायर्ड प्रोफेसरों को हर महीने 2.50 लाख रुपये तक का वेतन दिया जाएगा। ऐसे में यह मुद्दा भी उठने लगा है कि जहां एक ओर प्रदेश के युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं, वहीं सरकार मोटी सैलरी पर बुजुर्गों को दोबारा नियुक्त करने जा रही है।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल : 1500 करोड़ जमीन घोटाले में बढ़ी हलचल- जा सकती है मुख्य सचिव की कुर्सी, जानें

क्या है सुक्खू सरकार का तर्क

सरकार का तर्क है कि मेडिकल कॉलेजों में लंबे समय से विशेषज्ञ फैकल्टी की कमी बनी हुई है, जिससे पढ़ाई और मरीजों के इलाज दोनों प्रभावित हो रहे थे। खासकर सुपर स्पेशियलिटी विषयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए यह कदम उठाया गया है, ताकि छात्रों को बेहतर शिक्षा और अस्पतालों में मरीजों को विशेषज्ञ इलाज मिल सके।

 

नियुक्तियां अनुबंध आधार पर की जाएंगी और चयनित प्रोफेसरों को तय अवधि के लिए सेवाएं देनी होंगी। इसके लिए उम्मीदवारों को अंडरटेकिंग भी देनी होगी। स्वास्थ्य विभाग ने योग्य सेवानिवृत्त प्रोफेसरों से जल्द आवेदन करने की अपील की है, ताकि भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके।

यह भी पढ़ें : हिमाचल की पंचायतें खर्च नहीं कर पाई 150 करोड़ : सरकार ने वापस मांगा पूरा पैसा

स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा ने बताया कि आईजीएमसी शिमला और टांडा मेडिकल कॉलेज को छोड़कर अन्य संस्थानों में यह तैनाती की जाएगी। उनके अनुसार यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है।

एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान पकड़ रहा रफ्तार

वहीं, दूसरी ओर प्रदेश में एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए चलाए जा रहे इस अभियान के पहले चरण में कुल्लू जिला पूरे प्रदेश में अव्वल रहा है। 29 मार्च को हुए टीकाकरण में कुल्लू के पांचों स्वास्थ्य खंडों—जरी, नग्गर, बंजार, आनी और निरमंड—में 413 किशोरियों को टीका लगाया गया।

यह भी पढ़ें : हिमाचल होटल में लग रह थी जिस्म की बोली : आधी रात को पहुंची पुलिस, पंजाब की 3 महिलाएं रेस्क्यू

इस अभियान में शिमला दूसरे और मंडी तीसरे स्थान पर रहे। शिमला में 284 और मंडी में 282 किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन दी गई। पहले चरण में पूरे प्रदेश में 2,522 किशोरियों का टीकाकरण किया गया। पांच अप्रैल को दूसरे चरण की शुरुआत के साथ ही अन्य जिलों में भी किशोरियों में टीकाकरण को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख