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November 16, 2025

सुक्खू सरकार का बड़ा कदम: नशे में संलिप्त 80 सरकारी कर्मचारी किए बर्खास्त; पुलिस को दिया फ्री हैंड

नशा तस्करों पर सीएम सुक्खू की नो रिकमंडेशन नीति

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में बढ़ते नशे के खतरे के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने जिस तरह की कठोर नीति अपनाई है, उसने पूरे प्रदेश में एक सख्त संदेश दे दिया है। नशे के कारोबार और इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति के लिए जीरो टॉलरेंस नीति को अपनाया गया है। सरकार की इसी नीति के तहत नशा कारोबार से जुड़े पाए गए 80 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। प्रशासनिक इतिहास में इसे सबसे बड़ी सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

80 सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी

सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नशे से जुड़े किसी भी कर्मचारी को सरकारी तंत्र में जगह नहीं मिलेगी। नशे में संलिप्त पाए गए 80 कर्मचारियों की बर्खास्तगी न केवल अनुशासन और जवाबदेही की मिसाल है, बल्कि अन्य कर्मचारियों के लिए चेतावनी भी। यह कदम दर्शाता है कि सरकारी व्यवस्था में किसी भी तरह की अव्यवस्था, भ्रष्टाचार या नशे से जुड़ी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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चिट्टे पर सीएम सुक्खू की नो रिकमंडेशन नीति

पिछले वर्ष चिट्टे के मामलों में अचानक भारी बढ़ोतरी ने प्रदेश में चिंता की लहर पैदा कर दी थी। यहां तक कि लोगों में यह धारणा बनने लगी कि हिमाचल कहीं उड़ता पंजाब की राह पर न चल पड़े। लगातार बड़ी मात्रा में चिट्टा पकड़े जाने और तस्करों की धरपकड़ से ऐसा प्रतीत होने लगा था कि नशे का नेटवर्क गली.गली तक फैल चुका है। इसी माहौल में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने व्यक्तिगत रूप से मोर्चा संभालते हुए पुलिस को निर्देश दिए कि जो भी चिट्टे में संलिप्त है, चाहे वह नेता हो, अफसर हो, कर्मचारी हो या कोई भी व्यक्ति उसे सीधे जेल भेज दिया जाए, किसी भी तरह की सिफारिश स्वीकार नहीं की जाएगी।

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1214 तस्करों की अवैध संपत्ति पर नकेल

सरकार और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 1214 नशा तस्करों की अवैध संपत्ति का पता लगाकर जांच शुरू कर दी गई है। वहीं, अतिक्रमण से जुड़े 70 मामलों में भी कार्रवाई कर कड़े संदेश दिए गए हैं कि नशे से जुड़े किसी भी नेटवर्क को किसी स्तर पर संरक्षण नहीं मिलेगा।

इस साल 17.63 करोड़ की संपत्ति फ्रीज

सिर्फ इस वर्ष पुलिस ने नशा कारोबार से जुड़ी 17 करोड़ 63 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति फ्रीज की है। विशेषज्ञ इसे हिमाचल में अब तक की सबसे बड़ी वित्तीय कार्रवाई मान रहे हैं। सरकार जल्द ही पुलिस के सहयोग से चिट्टे और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ एक राज्यव्यापी विशेष अभियान शुरू करने जा रही है।

 

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छह हजार से अधिक एनडीपीएस मामले

वर्तमान सरकार के कार्यकाल में पुलिस ने 6,000 से अधिक एनडीपीएस मामलों का खुलासा किया है। साल 2024 में लागू किए गए च्प्ज्.छक्च्ै प्रावधानों ने कार्रवाई की गति और तेज कर दी है। अब तक 41 लोगों को डिटेंशन ऑर्डर के तहत हिरासत में लिया जा चुका है। राज्य में सिंथेटिक ड्रग्सकृविशेषकर चिट्टाकृके बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार और पुलिस लगातार रणनीतियों में बदलाव कर रहे हैं।

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वार्ड स्तरीय मैपिंग 

हिमाचल सरकार नशे की जड़ तक पहुंचने के लिए अब हर वार्ड में अलग-अलग स्तर पर नशा तस्करी की मैपिंग कर रही है। इसी के तहत प्रदेश के वार्डों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है

  • हरा क्षेत्र: जहां नशे से संबंधित कोई मामला नहीं
  • पीला क्षेत्र: जहां नशा तस्करी कम स्तर पर
  • लाल क्षेत्र: जहां नशे का प्रचलन अधिक

एसटीएफ की संरचना को मजबूत करते हुए धर्मशाला, मंडी और परवाणू को इस ढांचे में शामिल किया गया है। इसके साथ ही ऊना, कुल्लू, बद्दी और सिरमौर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों सहित कुल 13 पुलिस थानों को विशेष निगरानी के दायरे में लाया गया है।

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