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February 20, 2025
हिमाचल शिक्षा विभाग में छुट्टियों पर रोक, क्या है पूरा मामाला- जानिए विस्तार से
विधानसभा बजट सत्र को लेकर लिया गया फैसला
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शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र को देखते हुए शिक्षा विभाग में 3 मार्च से 28 मार्च तक छुट्टियों पर रोक लगा दी गई है। 10 मार्च से शुरू हो रहे इस बजट सत्र के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को बिना पूर्व अनुमति अवकाश नहीं दिया जाएगा। उच्च और प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं, जिनके तहत सभी प्रस्तावित छुट्टियों और टूर पर रोक रहेगी।
बजट सत्र के दौरान शिक्षा विभाग से जुड़े सभी मुद्दों और प्रश्नों के प्रभावी समाधान के लिए अधिकारियों को अपने कार्यालयों में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें सुबह 8:30 बजे से लेकर रात 8:00 बजे तक दफ्तर में मौजूद रहना अनिवार्य होगा। विभागीय अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे अपनी शाखा से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को अपडेट रखें और किसी भी आवश्यक जानकारी को तुरंत उपलब्ध कराने के लिए तैयार रहें।
शिक्षा विभाग ने अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक, सभी उपनिदेशक, सरकारी कॉलेजों के प्रिंसिपल, एनसीसी कमांडर, चीफ लाइब्रेरियन (सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी सोलन), प्रारंभिक शिक्षा के उपनिदेशक और डाइट प्रिंसिपल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की छुट्टियों को रद्द करने के आदेश जारी किए हैं। इन अधिकारियों के अधीन कार्यरत कर्मचारियों को भी इस दौरान अवकाश नहीं मिलेगा।
बजट सत्र के दौरान सरकार से शिक्षा विभाग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सवाल पूछे जा सकते हैं, जिनमें शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियां, खाली पदों की संख्या, विभागीय निरीक्षण की स्थिति, नए स्कूलों और कॉलेजों की स्थापना, तथा सरकारी योजनाओं की प्रगति से जुड़ी जानकारी शामिल है। ऐसे में अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इन सभी विषयों पर पूरी जानकारी पहले से तैयार रखें, ताकि सत्र के दौरान किसी भी प्रश्न का उत्तर देने में कोई कठिनाई न हो।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बजट सत्र के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रत्येक शाखा में कम से कम एक अधिकारी की सुबह से लेकर देर शाम तक उपस्थिति अनिवार्य होगी। सभी स्तरों के अधिकारी और कर्मचारी बजट सत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पूरी जिम्मेदारी और अनुशासन के साथ कार्य करें, ताकि विधानसभा में उठाए जाने वाले शिक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान सुचारू रूप से हो सके।