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January 30, 2026

हिमाचल में पंचायत चुनाव से पहले नया कानून, चिट्टा तस्कर नहीं लड़ सकेंगे Election

सरकारी कर्मचारीयों पर भी है नशे के केस दर्ज 

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Panchayat Elections

शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार अब उन लोगों के लिए सख्ती करने जा रही है, जो चिट्टा तस्करी में पकड़े गए हैं। इन लोगों को अब पंचायत चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है। इसके लिए सरकार ने विधि विभाग के साथ विचार-विमर्श किया और इस संबंध में एक नया ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसे अगले विधानसभा के बजट सत्र में पेश किया जाएगा।

FIR दर्ज लोग नहीं लड़ सकेगा पंचायत चुनाव

पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति चिट्टा के साथ पकड़ा जाता है या तस्करी के मामले में उस पर FIR दर्ज होती है, तो वह पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेगा। इसके लिए पंचायती राज एक्ट में भी नया कानूनी प्रावधान जोड़ा जाएगा।

 

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सरकारी कर्मचारीयों पर भी है नशे के केस दर्ज 

बता दें कि प्रदेश में ऐसे मामलों की संख्या कम नहीं है। पुलिसकर्मी और अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारी भी चिट्टा के मामलों में पकड़े गए हैं। कई मामलों में सरकार ने ऐसे कर्मचारियों की नौकरी तक समाप्त कर दी है। अब यही सख्ती पंचायत चुनावों में भी लागू की जाएगी।   

सख्त कानून से चिट्टा तस्करों पर रोक

मंत्री ने कहा कि राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल पहले ही कह चुके हैं कि किसी को चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित करना कानूनी मामला बन सकता है। इसलिए सरकार इस कानून में ऐसा प्रावधान जोड़ रही है, ताकि किसी को भी अदालत में चुनौती देने का मौका न मिले।

 

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मतदाता सूचियों की तैयारी भी जोरों पर

पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला उपायुक्तों को 30 जनवरी तक मतदाता सूचियों का प्रकाशन करने को कहा है। 31 जनवरी को पंचायतों का वर्तमान कार्यकाल खत्म हो रहा है। इसके बाद पंचायतों में प्रशासक लगाए जाएंगे।

पंचायत चुनाव से पहले मतदाता सूचियों का इंतजार

अभी तक 47 नगर निकायों में प्रशासक नियुक्त किए जा चुके हैं। हिमाचल सरकार ने प्रशासक नियुक्त करने के लिए राजस्थान और अन्य राज्यों के ड्राफ्ट का भी अध्ययन किया है। मतदाता सूचियों के प्रकाशन के बाद ही पंचायत चुनाव की अगली प्रक्रिया तय होगी। हालांकि चर्चा है कि वोटर सूचियों का प्रकाशन दो दिन आगे भी बढ़ सकता है।

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