#विविध
December 17, 2025
हिमाचल में लंबा ट्रैफिक जाम - न बर्फ, न छुट्टी... कहां से आए लोग, जानिए वायरल वीडियो का सच
दो से तीन दिन पुराना बताया जा रहा है वीडियो
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कुल्लू। न पहाड़ों पर बर्फबारी, न ही आने वाले दिनों के लिए मौसम विभाग का कोई अलर्ट, बावजूद इसके पहाड़ों के बीच गाड़ियों की अंतहीन कतारें नजर आई हैं। हिमाचल के रोहतांग दर्रे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें एक ही स्थान पर कई वाहन नजर आ रहे हैं। जिससे बाद कई जिज्ञासुओं की इच्छा ये जानने की है कि क्या ये वीडियो असली है या कई सालों पुराना। लोग हैरान है कि बर्फबारी के बिना भी हिमाचल में इतने ज्यादा टूरिस्ट कहां से आ रहे हैं।
यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जमकर वायलर हो रहा है। लोग कह रहे हैं कि क्या लोग ज़हरीले AQI से बचने के लिए पहाड़ों की ओर भाग रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब न बर्फ है और न छुट्टियां, तब रोहतांग जैसे संवेदनशील इलाके में इतना भारी ट्रैफिक आखिर क्यों है।
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार वीडियो रोहतांग दर्रे का ही है, लेकिन यह दो से तीन दिन पुराना बताया जा रहा है। वर्तमान में रोहतांग पास को प्रशासन ने बंद कर रखा है। मंगलवार को भी दर्रा बंद रहा, जिस कारण सैलानी रोहतांग तक नहीं पहुंच सके।
दर्रा बंद होने के चलते पर्यटकों की भीड़ कोकसर और सिस्सू से लेकर ग्रांफू तक ही सीमित रही। इन इलाकों में सैलानियों ने पैदल घूमकर प्राकृतिक नजारों का आनंद लिया। हालांकि सीमित रास्तों पर भीड़ बढ़ने से ट्रैफिक दबाव देखा गया।
न बर्फबारी और न वीकेंड, फिर भी हिमाचल के रोहतांग में भारी जाम pic.twitter.com/n81jpic4BE
— kajol chauhan (@THEKAYCEEvoice1) December 17, 2025
एसडीएम मनाली रमण कुमार शर्मा ने बताया कि बुधवार को भी रोहतांग दर्रा बंद रहेगा। मौसम और सड़क की स्थिति अनुकूल रहने पर वीरवार को सैलानियों को रोहतांग जाने की अनुमति दी जा सकती है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
वायरल वीडियो पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं भी चर्चा में हैं। कुछ ने लिखा कि इस स्थिति का एक कारण हिमाचल के कुछ कंटेंट क्रिएटर्स भी हैं, जिन्होंने बर्फबारी को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाई। वहीं प्रबंधन पर भी सवाल उठाए गए कि पर्यटन प्रमोशन की भी एक सीमा होनी चाहिए।
एक अन्य यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि बर्फ नहीं है, फिर भी सब कुछ सफेद-सफेद नजर आ रहा है। यह वायरल वीडियो एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि सोशल मीडिया के दौर में बिना मौसम और अनुमति के भी पहाड़ी इलाकों में बढ़ती भीड़ किस तरह ट्रैफिक और सुरक्षा के लिए चुनौती बनती जा रही है।