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February 15, 2026
हिमाचल: 4 बच्चों के पिता की दोनों किडनी फेल, गरीब परिवार के पास नहीं बचे इलाज को पैसे; मांगी सहायता
पत्नी और बूढ़ी मां के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी
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मंडी। गरीबी उस समय पूरे परिवार के लिए नासूर बन जाती है, जब गरीबी के बीच कोई गंभीर बीमारी लग जाए और घर का एकमात्र कमाने वाला सदस्य बिस्तर पकड़ ले। ऐसे समय में पूरा हसंता खेलता परिवार उजड़ने के कगार पर पहुंच जाता है। ऐसा ही एक मामला मंडी जिला के पधर उपमंडल से सामने आया है। यहां दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार को पेट पालने वाले शख्स गंभीर बीमारी से पीड़ित है। अब परिवार के पास ना तो इलाज के पैसे हैं और ना ही बच्चों को स्कूल भेजने के।
दरअसल पधर उपमंडल की ग्राम पंचायत डलाह के गदीबागला गांव में 41 वर्षीय हीरा लाल जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। कभी खेतों में मेहनत करने और दिहाड़ी.मजदूरी कर परिवार का पेट पालने वाले हीरा लाल आज बिस्तर तक सीमित हो गए हैं। उनकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं। जिससे परिवार के पालन पोषण और इलाज की जिम्मेदारी अब पत्नी और बूढ़ी मां के कंधों पर आ गई है।
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हीरा लाल सूरत राम के बेटे हैं और एक साधारण मेहनतकश परिवार से ताल्लुक रखते हैं। घर की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। तीन बेटियों और एक बेटे की पढ़ाई.लिखाई, घर का खर्च, बुजुर्ग माता.पिता की देखभाल सब कुछ वे अपनी मेहनत से संभालते थे। लेकिन गंभीर बीमारी ने सब कुछ बदल दिया। अब हालात ऐसे हैं कि घर में कमाई का कोई स्थायी साधन नहीं है। पत्नी दिन.रात चिंता में डूबी रहती है, जबकि बूढ़ी मां की आंखें बेटे की हालत देखकर नम हो जाती हैं।
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हीरा लाल का इलाज पीजीआई चंडीगढ़ में चल रहा है। डॉक्टरों ने नियमित डायलिसिस की सलाह दी है और महंगी दवाइयां लगातार लेनी पड़ रही हैं। भविष्य में किडनी ट्रांसप्लांट की संभावना भी जताई गई है, जिसके लिए लाखों रुपये की आवश्यकता होगी। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं कि इस भारी खर्च को उठा सके। जो थोड़ी.बहुत बचत थी, वह इलाज में खर्च हो चुकी है।
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सबसे बड़ा दर्द उन मासूम बच्चों का है, जो अपने पिता को फिर से स्वस्थ देखना चाहते हैं। स्कूल जाने वाले इन बच्चों के सामने अब पढ़ाई छोड़ने का खतरा मंडरा रहा है। फीस, किताबें और रोजमर्रा का खर्च जुटाना भी कठिन हो गया है। जब घर का इकलौता सहारा ही बीमार पड़ जाए, तो रोटी और इलाज के बीच चुनाव करना पड़ता है और यही स्थिति इस परिवार के सामने खड़ी है।
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संकट की इस घड़ी में हीरा लाल का परिवार समाज से मदद की आस लगाए बैठा है। परिजनों ने दानी सज्जनों, सामाजिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों से आर्थिक सहयोग की अपील की है। उनका कहना है कि यदि समाज का थोड़ा.सा सहारा मिल जाए, तो हीरा लाल को नया जीवन मिल सकता है और बच्चों की पढ़ाई भी जारी रह सकती है।