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April 22, 2026

सुक्खू सरकार का बड़ा कदम: केंद्र के अधीन 4 पावर प्रोजेक्ट्स को वापस लेगा हिमाचल, तेज की प्रक्रिया

सुक्खू सरकार ने लागत लौटाकर मालिकाना हक लेने की बनाई रणनीति

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himachal power project

शिमला। हिमाचल प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था और आर्थिक भविष्य को नई दिशा देने वाली बड़ी पहल तेज हो गई है। राज्य में केंद्र सरकार के अधीन चल रहे चार बड़े जल विद्युत प्रोजेक्ट अब जल्द ही हिमाचल सरकार के नियंत्रण में आ सकते हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इन परियोजनाओं को अपने अधीन लाने की प्रक्रिया को रफ्तार दे दी है। सरकार ने इस पूरी कार्यवाही का ब्यौरा हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष पेश कर दिया है, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

हाईकोर्ट में पेश हुई पूरी रणनीति

हिमाचल सरकार ने हाईकोर्ट में स्पष्ट किया कि लुहरी स्टेज-1 (210 मेगावाट), धौलासिद्ध (66 मेगावाट), सुन्नी बांध (382 मेगावाट) और डुगर हाइड्रो इलेक्ट्रिक (500 मेगावाट) परियोजनाओं को अपने अधीन लेने के लिए संबंधित कंपनियों से विस्तृत जानकारी मांगी गई है। यह प्रक्रिया इसलिए अपनाई जा रही है ताकि परियोजनाओं पर हुए खर्च का सही आकलन कर कंपनियों को लागत मूल्य लौटाया जा सके।

 

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कंपनियों से मांगा गया पूरा वित्तीय ब्योरा

सरकार ने एनएचपीसी और एसजेवीएनएल से परियोजनाओं की वर्षवार बैलेंस शीट, पूंजीगत कार्यों का विवरण, निर्माण की प्रगति, अचल संपत्तियों की सूची सहित हर वित्तीय पहलू की जानकारी देने को कहा है। इसके साथ ही सिविल वर्क, निर्माण, रखरखाव, भूमि अधिग्रहण और बैंक ऋण जैसी सभी मदों का विस्तृत हिसाब भी मांगा गया है। कंपनियों द्वारा बैंकों को दिए गए मूल्यांकन नोट की प्रतियां भी सरकार ने तलब की हैं।

15 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क की मांग बनी मुद्दा

इन परियोजनाओं को हस्तांतरित करने के बदले कंपनियों ने निर्माण लागत के साथ 15 प्रतिशत पर्यवेक्षण शुल्क की मांग भी रखी है। इस पर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है, लेकिन सरकार सभी पहलुओं का गहराई से अध्ययन कर रही है ताकि राज्य के हितों से कोई समझौता न हो।

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हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही प्रक्रिया

मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की खंडपीठ कर रही है, जहां कंपनियों ने भरोसा दिलाया है कि वे जल्द सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराएंगी। अदालत ने पहले ही कंपनियों को संरक्षण देते हुए राज्य सरकार को किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से रोका है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि राज्य परियोजनाएं अपने अधीन लेता है तो कंपनियों को भुगतान की प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार होगी।

आर्थिक मजबूती की ओर बड़ा कदम

इन चारों परियोजनाओं के हिमाचल के नियंत्रण में आने से प्रदेश की आय में बड़ा इजाफा होने की संभावना है। बिजली उत्पादन से मिलने वाला राजस्व सीधे राज्य के खजाने में जाएगा, जिससे विकास कार्यों को गति मिलेगी। सुक्खू सरकार की यह पहल न केवल ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाएगी, बल्कि आर्थिक स्थिति को भी मजबूत आधार प्रदान करेगी।

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नए समझौतों की तैयारी में जुटी सरकार

राज्य सरकार ने कंपनियों को नए सिरे से एग्रीमेंट करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत सभी शर्तों को पुनः निर्धारित किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो। सरकार का फोकस साफ है—प्रदेश के संसाधनों पर प्रदेश का अधिकार सुनिश्चित करना और उससे अधिकतम लाभ उठाना। इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो गया है कि हिमाचल सरकार अब अपने प्राकृतिक संसाधनों पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए निर्णायक कदम उठा रही है, और आने वाले समय में इसका असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देगा।

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