#विविध
December 26, 2025
हिमाचल: मोबाइल से इन गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे बच्चे, अध्ययन में खुलासा; नाम है 'नोमोफोबिया'
406 विद्यार्थियों पर किया अध्ययन
शेयर करें:

शिमला। फोन की लत अब बच्चों और युवाओं के लिए गंभीर समस्या बन गई है। इसके चलते न केवल पढ़ाई पर ध्यान कम हुआ है, बल्कि परिवार के साथ बिताया गया समय भी घट गया है। हाल ही में हिमाचल प्रदेश के IGMC (इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज) शिमला के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की टीम ने 406 विद्यार्थियों पर अध्ययन किया, जिसमें पता चला कि कई बच्चे नोमोफोबिया (फोन न होने की घबराहट) की बीमारी के शिकार हो रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, IGMC शिमला में MBBS छात्रों पर किए गए एक अध्ययन में नोमोफोबिया के कई मामले सामने आए हैं। अध्ययन में पाया गया कि 70.7% छात्रों में मध्यम स्तर का नोमोफोबिया था, जबकि 19% छात्र गंभीर रूप से प्रभावित पाए गए। जानकारी गूगल फॉर्म के जरिए इकट्ठा की गई।
यह भी पढ़ें : CM सुक्खू के साथ डॉक्टरों की बैठक खत्म, हड़ताल पर फैसला बाकी- IGMC में मरीज बिना इलाज लौटे
अध्ययन में छात्रों की सामाजिक स्थिति, स्मार्टफोन इस्तेमाल की आदतें, नींद और स्वास्थ्य पर असर देखा गया। शामिल अधिकतर छात्र 20 से 22 साल के थे, जो कुल का 52.8% हैं। छात्राओं की संख्या 52.2% थी और लगभग 58% छात्र शहरी इलाकों से थे। लगभग सभी छात्रों (99.3%) के पास स्मार्टफोन था, जिनमें से 75% छात्रों ने एंड्रॉयड फोन इस्तेमाल किया। छात्रों ने बताया कि वे औसतन लगभग छह साल से स्मार्टफोन इस्तेमाल कर रहे हैं।
नोमोफोबिया वह बीमारी है जिसमें बच्चों के पास फोन या इंटरनेट न होने का डर लगता है। इससे चिंता, घबराहट, बेचैनी, बार-बार फोन चेक करने की लत जैसी भावनाएं पैदा होती हैं और कभी-कभी सिरदर्द या सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। इसे स्मार्टफोन की लत का एक रूप माना जाता है।