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October 18, 2026

हिमाचल के युवक की रूस में मौ**त, अनुराग ठाकुर के प्रयासों से 18 दिन बाद घर पहुंची देह

अनुराग ठाकुर के प्रयासों से युवक का उसके पैतृक गांव में हुआ अंतिम संस्कार

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Hamirpur News

हमीरपुर। आंखों में बेहतर भविष्य के सपने और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की उम्मीद लेकर हिमाचल प्रदेश का एक युवक रोजगार की तलाश में रूस गया था। परिवार को उम्मीद थी कि बेटा विदेश में मेहनत करके घर की परिस्थितियां बदलेगा, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि जिस बेटे को उन्होंने बेहतर जिंदगी की उम्मीद के साथ विदा किया हैए एक दिन उसी का पार्थिव शरीर घर लौटेगा।

रूस में हुई युवक की मौत

रूस में बीमारी के चलते युवक की मौत हो गई और आर्थिक तंगी के कारण उसका शव करीब 18 दिनों तक विदेश में ही फंसा रहा। आखिरकार, हमीरपुर के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर के प्रयासों से युवक का पार्थिव शरीर उसके पैतृक गांव पहुंचा। बेटे को अंतिम बार देखने की आस लगाए बैठे माता-पिता को उसके अंतिम दर्शन तो हुए, लेकिन यह मुलाकात उनके जीवन का सबसे दर्दनाक पल बन गई।

 

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कहां का रहने वाला था युवक 

यह दुखद घटना हमीरपुर जिले के सुजानपुर उपमंडल की ग्राम पंचायत बड़ई की है। यहां के निवासी विनीत कुमार की रूस में बीमारी के कारण मौत हो गई थी। परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति, अस्पताल के भारी खर्च और जरूरी औपचारिकताओं के चलते परिजन लंबे समय तक बेटे के शव को वापस लाने के लिए संघर्ष करते रहे। जब विनीत का पार्थिव शरीर शनिवार को उसके घर पहुंचा, तो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। गमगीन माहौल में परिजनों ने उसे अंतिम विदाई दी और उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

सितंबर में बिगड़ी थी तबीयत

बताया जा रहा है कि रूस पहुंचने के कुछ ही समय बाद युवक की तबीयत बिगड़ने लगी। सितंबर में विनीत की स्वास्थ्य स्थिति ज्यादा खराब हो गई। उसने 28 सितंबर को भारत लौटने के लिए टिकट भी बुक करवा ली थी। परिजनों को उम्मीद थी कि वह जल्द घर लौट आएगा और अपने लोगों के बीच रहकर इलाज करवा सकेगा। लेकिन भारत लौटने की तैयारी के दौरान ही उसकी हालत गंभीर हो गई।

 

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बताया गया कि रूस के एयरपोर्ट पर पहुंचते ही विनीत की तबीयत अधिक बिगड़ गई, जिसके बाद उसे तत्काल वहां के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। डॉक्टरों के उपचार के बावजूद 29 सितंबर को उसने दम तोड़ दिया। 

आर्थिक तंगी ने बढ़ाई परिवार की परेशानी

विनीत की मौत के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके पार्थिव शरीर को रूस से भारत लाने की थी। परिजनों के मुताबिक, रूस के अस्पताल प्रबंधन की ओर से इलाज का खर्च करीब पांच से छह लाख रुपये बताया गया था। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण इतनी बड़ी रकम का तत्काल इंतजाम करना आसान नहीं था।

 

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एक तरफ बेटे को खोने का असहनीय दुख था, तो दूसरी ओर उसका अंतिम दर्शन करने की उम्मीद भी पैसों और औपचारिकताओं के बीच अटकी हुई थी। इसी वजह से विनीत का पार्थिव शरीर करीब 17 से 18 दिनों तक रूस में ही फंसा रहा। इस दौरान परिजन लगातार परेशान रहे और बेटे के शव को घर लाने के लिए मदद की आस लगाए बैठे थे।

अनुराग ठाकुर तक पहुंचा मामला

परिवार की इस मुश्किल घड़ी में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मदद की पहल की। पंचायत प्रधान रविंदर, उपप्रधान गोल्डी, नरेश, सतीश और पूर्व बीडीसी सदस्य अमरदीप राणा ने हमीरपुर के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर से मुलाकात की और उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी।

 

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मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुराग ठाकुर ने हस्तक्षेप किया और युवक के पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए प्रयास किए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनके प्रयासों के बाद महज दो दिनों के भीतर विनीत का शव रूस से दिल्ली पहुंचाया गया। इससे परिवार को अपने बेटे का पार्थिव शरीर घर लाने की दिशा में बड़ी राहत मिली।

 

दिल्ली से युवक की देह को उसके पैतृक गांव लाने के लिए भी अनुराग ठाकुर ने मदद की। अनुराग ठाकुर के सहयोग से एक संस्था की ओर से निःशुल्क एंबुलेंस की व्यवस्था करवाई गई। इसके बाद विनीत का पार्थिव शरीर उसके गांव बड़ई लाया गया।

 

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घर पहुंचा बेटे का शव

शनिवार को जैसे ही विनीत का पार्थिव शरीर उसके पैतृक घर पहुंचा, परिवार में चीख-पुकार मच गई। माता-पिता और अन्य परिजनों के लिए इस सच्चाई को स्वीकार करना बेहद कठिन था कि जिस बेटे की वापसी का इंतजार वे इतने दिनों से कर रहे थे, वह अब कभी उनसे बात नहीं कर सकेगा।

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मुश्किल समय में मदद से संभव हो सकी अंतिम विदाई

विनीत के मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की पहल और सांसद अनुराग सिंह ठाकुर के हस्तक्षेप के बाद पार्थिव शरीर भारत लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी। परिवार की आर्थिक मजबूरियों के बीच शव को रूस से दिल्ली और फिर पैतृक गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था ने परिजनों को अंतिम संस्कार करने का अवसर दिया।

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