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June 23, 2026
हिमाचल पर फिर मेहरबान मोदी सरकार: सालों से अधूरे पड़े विकास कार्यों को दे रही विशेष बजट
केंद्र सरकार ने इसको लेकर जारी की अधिसूचना, बदलेगी प्रदेश के शहरों की तस्वीर
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धर्मशाला। केंद्र की मोदी सरकार एक बार फिर हिमाचल प्रदेश के विकास को नई गति देने के लिए आगे आई है। प्रदेश के शहरों में वर्षों से अधूरे पड़े विकास कार्यों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने विशेष वित्तीय सहायता देने का बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले के तहत लंबे समय से बजट के अभाव में अटकी परियोजनाओं को अब नई रफ्तार मिलने की उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार ने इसको लेकर अधिसूचना भी जारी कर दी है।
केंद्र सरकार ने देशभर के शहरों के लिए विशेष प्रावधान करते हुए अधूरे और लंबित विकास कार्यों को पूरा करने हेतु 25 प्रतिशत तक विशेष बजट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। इसका सीधा लाभ हिमाचल प्रदेश को भी मिलने जा रहा है, जहां कई महत्वपूर्ण शहरी विकास परियोजनाएं संसाधनों की कमी के कारण वर्षों से अधूरी पड़ी हैं।
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प्रदेश के विभिन्न शहरों में स्मार्ट सिटी, अमृत योजना, स्वच्छ भारत मिशन और अन्य विकास योजनाओं के तहत कई कार्य किए गए, लेकिन अनेक परियोजनाएं अब भी अधूरी हैं। इनमें सड़क सुधार, यातायात प्रबंधन, सीवरेज नेटवर्क, पेयजल व्यवस्था, जल निकासी, कूड़ा प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। केंद्र सरकार की नई पहल से अब इन लंबित परियोजनाओं को पूरा करने का रास्ता साफ हो गया है। इससे न केवल शहरों की मूलभूत सुविधाएं मजबूत होंगी बल्कि लोगों को भी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं से राहत मिलेगी।
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नई व्यवस्था के तहत नगर निगम, नगर परिषद और अन्य शहरी निकाय उन परियोजनाओं के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज सकेंगे जो पहले किसी योजना में शामिल नहीं हो सकीं या बजट की कमी के कारण अधूरी रह गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वित्तीय सहायता से प्रदेश में कई ऐसे विकास कार्य पूरे हो सकेंगे जो वर्षों से फाइलों में अटके हुए हैं। इससे शहरी विकास को नया आयाम मिलेगा और शहरों के बुनियादी ढांचे में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
केंद्र सरकार का मानना है कि देश के कई शहरों में विकास योजनाओं के बावजूद अभी भी ट्रैफिक जाम, जलभराव, सीवरेज, पेयजल संकट, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और शहरी बाढ़ जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त वित्तीय सहायता का निर्णय लिया गया है। हिमाचल प्रदेश के शहरों में भी इन समस्याओं का असर लंबे समय से देखा जा रहा है। ऐसे में यह विशेष बजट स्थानीय निकायों के लिए राहत का बड़ा माध्यम साबित हो सकता है।
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हालांकि केंद्र सरकार की ओर से 25 प्रतिशत तक विशेष सहायता दी जाएगी, लेकिन शेष 75 प्रतिशत राशि राज्य सरकार और संबंधित विभागों को वहन करनी होगी। इसके बावजूद इस योजना को हिमाचल के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को शुरू करने और पूरा करने का अवसर मिलेगा।
धर्मशाला सहित प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरी क्षेत्रों में भी इस योजना का लाभ मिलने की संभावना है। नगर निगम धर्मशाला और स्मार्ट सिटी प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि शहरों की विशेष समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र सरकार की ओर से यह प्रावधान काफी उपयोगी साबित होगा।
केंद्र सरकार के इस फैसले से साफ है कि हिमाचल प्रदेश के शहरी विकास को नई ऊर्जा देने की तैयारी की जा रही है। यदि परियोजनाओं के प्रस्ताव समय पर तैयार कर भेजे गए, तो आने वाले वर्षों में प्रदेश के कई शहरों की तस्वीर बदल सकती है। लंबे समय से अधूरे पड़े विकास कार्य पूरे होंगे और लोगों को बेहतर बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।