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May 5, 2025
लोन पर चल रहे हिमाचल के विभागों के ठाठ, CAG ने दिखाया आईना- कार्रवाई की चेतावनी
4 साल से बजट आवंटन से ज्यादा खर्च कर रहे हैं सरकारी विभाग
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शिमला। बाहर से कर्ज लेकर सरकारी कर्मियों को सैलरी दे रही हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार के सरकारी विभागों के अपने ठाठ हैं। बजट में उन्हें जितना फंड मिलता है, उससे ज्यादा खर्च किया जा रहा है। वह भी 2021-22 से, यानी कि बीते 4 साल से। ये खर्च कहां और क्यों हो रहा है, यह तो हिसाब-किताब देखकर ही पता चलेगा। लेकिन इस हिसाब-किताब पर नजर रखने वाली CAG ने इस दुखती रग को दबा दिया है। CAG ने बजट से ज्यादा खर्च करने वाले विभागों पर वित्तीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
CAG का कहना है कि उसका काम बजट आवंटन के हिसाब से विभाग के खर्चों का ब्योरा विधानसभा में रखना है। लेकिन जब सरकारी विभाग ही वित्तीय अनुशासन को अनदेखा कर ज्यादा खर्च करने लगते हैं तो CAG को दोबारा सारा हिसाब-किताब चेक कर फिर रिपोर्ट बनानी पड़ती है। ऐसे में CAG का समय तो जाता ही है, साथ में दोगुनी मेहनत लगती है। CAG की परेशानी को इस बात से समझा जा सकता है कि उसे आखिर में जब सारे आंकड़े जुटाकर रिपोर्ट बनानी पड़ती है, लेकिन रिपोर्ट बनाते समय पता चलता है कि विभागों ने सीमा से ज्यादा खर्च किया है।
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CAG का कहना है कि सरकारी विभाग बार-बार वित्तीय अनुशासन के नियम की अवहेलना कर रहे हैं। अब CAG ने विधानसभा की लोकलेखा कमेटी से जवाब मांगा है। CAG ने वित्त विभाग से भी कहा है कि वह इस बात पर सफाई पेश करे कि सरकारी विभाग बजट आवंटन की हद तोड़कर क्यों इतना खर्च कर रहे हैं। वित्त विभाग की बजट शाखा ने सुक्खू सरकार के सभी विभागों के प्रशासनिक सचवों और विभागाध्यक्षों को चिट्ठी लिखकर उनसे भी सफाई मांगी है। प्रधान सचिव वित्त ने एक पत्र जारी कर वित्त वर्ष 2021-22 से बजट से ज्यादा खर्चा करने पर सभी विभागों से सफाई मांगी गई है।
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CAG ने बजट आवंटन से ज्यादा खर्च करने वाले सरकारी विभागों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की है। इस पर वित्त विभाग का कहना है कि वित्तीय अनुशासन नियमों का पालन न करने वाले विभाग खर्च का अनुमानित ब्योरा भेज रहे हैं, जिससे बजट के बाद भी विभागों की अनुपूरक मांगें बन रही हैं। वित्त विभाग ने यह भी कहा है कि उनसे मंजूरी लिए बिना बजट प्रावधान से ज्यादा कोई खर्च नहीं किया जाए। साथ ही खर्च के सही आंकड़े ही भेजे जाएं, ताकि अनुपूरक मांगें न बनें और अधिकतम बचत हो।