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August 10, 2025
सुक्खू सरकार हुई सख्त: स्कूलों में मोबाइल लाने वाले छात्रों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
स्कूलों में मोबाइल फोन की पाबंदी को सख्ती से लागू करने को कहा
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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अब स्कूलों में छात्रों द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने का निर्णय लिया है। इस दिशा में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में शिक्षा विभाग को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि पहले से ही विद्यालयों में छात्रों के मोबाइल फोन लाने और उपयोग करने पर रोक है, लेकिन इस प्रतिबंध को अब और अधिक सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि खासतौर पर ग्रामीण इलाकों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि कई विद्यार्थी स्कूल समय में मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो कि अनुशासन और अध्ययन दोनों के लिए हानिकारक है। ऐसे मामलों पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
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विशेषज्ञों और शिक्षकों का मानना है कि मोबाइल फोन की लत बच्चों की एकाग्रता, पढ़ाई की निरंतरता और मानसिक विकास पर नकारात्मक असर डालती है। मुख्य सचिव ने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए शिक्षकों को भी आगे आकर विद्यार्थियों को मोबाइल के सीमित और सकारात्मक उपयोग के बारे में जागरूक करना होगा। उन्हें यह समझाना जरूरी है कि मोबाइल फोन एक उपयोगी उपकरण हो सकता है, यदि इसका सही समय और उद्देश्य के साथ प्रयोग किया जाए।
शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों को सामान्य ज्ञान की जानकारी के साथ-साथ यह भी समझाएं कि तकनीक का इस्तेमाल कब और कैसे करना चाहिए, जिससे वे अपनी पढ़ाई में इसे बाधा बनने देने के बजाय सहयोगी बना सकें।
सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधारों की दिशा में कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य न केवल स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन और अध्ययन के प्रति समर्पण की भावना भी विकसित करना है। स्कूलों में मोबाइल फोन पर रोक को भी इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि पढ़ाई का वातावरण बेहतर बन सके।
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राज्य सरकार ने पहले ही कई जिलों में मॉडल स्कूलों की स्थापना शुरू कर दी है और शिक्षकों को समय-समय पर प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, ताकि वे नई शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों को बेहतर ढंग से शिक्षित कर सकें।