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January 13, 2026
वर्दी तो गई... अब 11 पुलिस कर्मियों की संपत्ति भी होगी जब्त, सीएम सुक्खू ने दिए सख्त निर्देश
नौकरी से टर्मिनेट करने के बाद अब संपत्ति की जांच के आदेश
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में चिट्टा तस्करों के खिलाफ मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। खास कर नशा तस्करी में संलिप्त पुलिस कर्मियों के लिए सुक्खू सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति अपना ली है। नशा तस्करी में पकड़े गए जिन 11 पुलिस कर्मियों को कल तक अपनी वर्दी का गुमान था, सुक्खू सरकार ने ना सिर्फ उनकी वर्दी छीन ली है, बल्कि अब उनकी अवैध संपत्तियों को सीज करने के भी निर्देश दे दिए हैं।
सीएम के इन आदेश ने यह साफ कर दिया है कि देवभूमि में नशे के सौदागरों के लिए कोई माफी नहीं है। सीएम सुक्खू ने इन 11 पुलिस कर्मियों की संपत्ति की जांच के भी आदेश दे दिए हैं, जिसमें उनकी अवैध तरीके से अर्जित की गई संपत्ति को भी सीज किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बाद यह तय किया गया है कि चिट्टा तस्करी में लिप्त पाए गए सभी पुलिस कर्मियों की संपत्ति, बैंक खाते, निवेश और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जाएगी। जांच एजेंसियां यह पता लगाएंगी कि इन कर्मियों ने नशे के अवैध कारोबार से कितना धन अर्जित किया और वह धन किन-किन माध्यमों से छुपाया गया।
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इतना ही नहीं जांच का दायरा अब और व्यापक किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार संबंधित पुलिस कर्मियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी खंगाली जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे किन लोगों के संपर्क में थे और नशा तस्करी के नेटवर्क में उनकी भूमिका कितनी गहरी थी। सरकार का मानना है कि बिना नेटवर्क के इतना बड़ा अवैध कारोबार संभव नहीं है।
जांच केवल दोषी पुलिस कर्मियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके करीबी संपर्कों, सहयोगियों और संभावित संरक्षण देने वालों तक भी पहुंचेगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि यह अवैध धंधा किसके इशारे पर और किसके संरक्षण में फल-फूल रहा था। मुख्यमंत्री सुक्खू ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि किसी भी स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों या प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी बिना किसी दबाव और भेदभाव के सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा है कि नशे के खिलाफ सरकार की नीति “जीरो टॉलरेंस” की है। पुलिस विभाग की वर्दी पहनकर नशा तस्करी जैसे संगीन अपराध में लिप्त रहने वालों से कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। सरकार का उद्देश्य केवल नौकरी से बर्खास्त करना नहीं है, बल्कि नशे से कमाई गई हर अवैध संपत्ति को जब्त कर कानून के हवाले करना है।
गौरतलब है कि सुक्खू सरकार पहले ही नशा तस्करी में शामिल 11 पुलिस कर्मियों को बर्खास्त कर स्पष्ट संदेश दे चुकी है। अब संपत्ति जांच और जब्ती की कार्रवाई से यह संदेश और भी सख्त हो गया है कि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों की न नौकरी बचेगी और न ही अवैध कमाई। सरकार का कहना है कि हिमाचल को नशामुक्त बनाने के लिए नशा तस्करी के पूरे नेटवर्क को जड़ से तोड़ा जाएगा। चाहे वह तस्कर हो या वर्दी में बैठा कोई अपराधी—किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा।