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March 10, 2026
हिमाचल: 26 की उम्र में देश पर कुर्बान हो गया अक्षित, कमांडो ट्रेनिंग के बाद छुट्टी लेकर आना था घर
कमांडो ट्रेनिंग के दौरान नदी में डूब गया अक्षित, गोतोखोरों ने निकाली पार्थिव देह
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बैजनाथ (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश की वीरभूमि ने एक बार फिर देश के लिए अपना एक बहादुर बेटा खो दिया। कांगड़ा जिले के बैजनाथ क्षेत्र का 26 वर्षीय जवान अक्षित शर्मा जम्मू.कश्मीर में सैन्य प्रशिक्षण के दौरान हादसे का शिकार हो गया और देश सेवा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गया। जिस घर में कल तक हंसी गूंज रही थी, आज वहां मातम पसरा हुआ है। पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और हर आंख नम है।
जानकारी के अनुसार जवान जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के सुंदरबनी क्षेत्र में तैनात थे और कमांडो की ट्रेनिंग ले रहा था। यहां सैनिकों को भारतीय सेना की ओर से नदी पार करने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा था। इसी दौरान सोमवार दोपहर के समय मिनावर तवी नदी में अभ्यास करते वक्त अचानक वह गहरे पानी में चले गए और लापता हो गए।
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हादसे की सूचना मिलते ही सेना के अधिकारियों ने तुरंत खोज अभियान शुरू कर दिया। जवानों के साथ स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमों ने भी नदी के आसपास तलाशी अभियान चलाया, लेकिन देर रात तक उनका कोई पता नहीं चल पाया। इसके बाद आज मंगलवार सुबह सेना के गोताखोरों की मदद से फिर से सर्च अभियान शुरू किया गया, जिसके दौरान नदी से उनका पार्थिव शरीर बरामद किया गया।
बताया जा रहा है कि अक्षित पिछले सात वर्षों से सेना में अपनी सेवाएं दे रहे थे और पंजाब रेजिमेंट का हिस्सा थे। कम उम्र में ही उन्होंने सेना की वर्दी पहनकर देश सेवा का सपना पूरा किया था। अपने कर्तव्य और अनुशासन के कारण वह साथियों के बीच भी बेहद सम्मानित माने जाते थे। बताया जा रहा है कि जवान अक्षित ने ट्रेनिंग के बाद छुट्टी लेकर घर आने की बात कही थी, लेकिन अब वह तिरंगा ओढ़ कर घर पहुंचेगा।
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अक्षित का परिवार बैजनाथ के प्रसिद्ध बैजनाथ शिव मंदिर से जुड़ा रहा है। उनके पिता पहले यहां पुजारी के रूप में सेवा दे चुके हैं। जिस घर में कल तक खुशियों की रौनक थी, वहां आज सन्नाटा और सिसकियां सुनाई दे रही हैं। बेटे की शहादत की खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अक्षित के पैतृक गांव उस्तेहड़ में जैसे ही यह दुखद खबर पहुंची, पूरे गांव में शोक का माहौल बन गया। लोग परिवार को ढांढस बंधाने के लिए उनके घर पहुंच रहे हैं। हर कोई यही कह रहा है कि इतनी छोटी उम्र में बेटे ने देश के लिए बड़ी कुर्बानी दे दी।
फिलहाल जवान का पार्थिव शरीर जम्मू में रखा गया है और सेना की ओर से उसे पूरे सम्मान के साथ पैतृक गांव लाने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। उम्मीद है कि अंतिम दर्शन के लिए गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे। जवान की पार्थिव देह कल बुधवार को उनके पैतृक गांव पहुंचेगी जहां पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनको अंतिम विदाई दी जाएगी।
हिमाचल प्रदेश को वीरों की भूमि कहा जाता है और यहां के युवाओं ने हमेशा देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है। अक्षित शर्मा की शहादत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हिमाचल का हर बेटा देश की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहता है। हालांकि यह गर्व का क्षण हैए लेकिन बेटे को खोने का दर्द परिवार और पूरे प्रदेश को गहरे तक झकझोर गया है।