#विविध
September 11, 2025
हिमाचल: लाखों खर्च कर बनाए थे सपनों के घर, जमीन धंसने से 25 मकानों में आई दरारें; करने पड़े खाली
भूस्खलन और जमीन धंसने से दो गांवों पर मंडराया खतरा
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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून ने कहर बरपा दिया है। लगातार हो रही भारी बारिश से प्रदेश के कई इलाकों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। सड़कों के टूटने, पुलों के बहने और किसानों की फसलें तबाह होने के साथ.साथ अब भूस्खलन ;लैंडस्लाइडद्ध की घटनाओं ने लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। कुल्लू जिले की सैंज घाटी इस तबाही का ताजा उदाहरण बनकर सामने आई है, जहां कई गांवों में जमीन धंसने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। नतीजतन दर्जनों घरों में दरारें आ गई हैं और कई मकान गिरने की कगार पर हैं।
सैंज घाटी के मातला और जाखला गांवों में जमीन धंसने के कारण कम से कम 25 घरों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इन घरों में इतनी बड़ी दरारें आ गई हैं कि अब रहना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। गांव के पास स्थित पहाड़ी से लगातार चट्टानें खिसक रही हैं, जिससे खतरा और भी ज्यादा बढ़ गया है।
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भूस्खलन से बेघर हुए कई परिवार इस समय अस्थायी शिविरों या रिश्तेदारों के घरों में शरण लिए हुए हैं। कुछ परिवार एनएचपीसी की डंपिंग साइट पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। मातला गांव के निवासी 75 वर्षीय ज्ञानचंद ने बताया कि घर गिरने के डर से हमने अपना आशियाना छोड़ दिया है। पूरा इलाका असुरक्षित हो गया है। सरकार को चाहिए कि इस जमीन को अधिग्रहित कर हमें किसी सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए।
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प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। गांववासियों ने खुद पटवारी को मौके पर बुलाकर घरों की स्थिति का जायजा दिलाया और रिपोर्ट तैयार करवाई। महिला ग्रामीण यान दासी ने बताया कि हमारी ज़मीन, बगीचे और गौशालाएं सब तबाह हो चुकी हैं। पशुओं के लिए चारे का भी संकट है। प्रशासन ने अब तक हमारी सुध नहीं ली है।
सुचेहन पंचायत की प्रधान सीताबंती ने बताया कि एनएचपीसी के मातला डंपिंग स्थल पर राहत शिविर स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। वहीं, तहसीलदार सैंज नरेंद्र कुमार शर्मा ने जानकारी दी कि प्रभावित परिवारों को तिरपाल उपलब्ध करवाई गई हैं और राशन सहित अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था की जा रही है।
सिर्फ कुल्लू ही नहीं, पूरे हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून का रौद्र रूप देखने को मिला है। राज्य के कई जिलों में मूसलधार बारिश से घरों के गिरने, पुल बहने, और सड़कें बंद होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अनुमान है कि मानसून के चलते राज्य में अब तक हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हो चुका है।
स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में हो रहे अंधाधुंध निर्माण और अनियोजित विकास कार्य इस तरह की आपदाओं को और गंभीर बना रहे हैं। अब वक्त आ गया है जब सरकार को न सिर्फ राहतए बल्कि पुनर्वास और स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
हिमाचल प्रदेश की हसीन वादियों में बसे गांवों के लिए इस बार मानसून कोई वरदान नहीं, बल्कि एक भयानक सपना बन गया है। खासतौर पर सैंज घाटी के लोग इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं एक ओर घर टूटने का दर्द और दूसरी ओर अनिश्चित भविष्य की चिंता। ऐसे में सरकार और प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वे जल्द से जल्द राहत और पुनर्वास के लिए ठोस कार्य योजना बनाएं और लोगों को इस संकट से उबारें।