#विविध
March 22, 2026
हिमाचल में चौंकाने वाला रिजल्ट: 100 पदों की भर्ती परीक्षा में मात्र 15 अभ्यर्थी ही हुए पास
हिमाचल शिक्षक भर्ती परीक्षा परिणाम को देख कर उड़े लोगों के होश
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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश से एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है] जिसने न केवल शिक्षा व्यवस्था बल्कि प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित सीमित सीधी भर्ती (LDR) परीक्षा के परिणाम में नॉन-मेडिकल विषय का प्रदर्शन सबसे ज्यादा चौंकाने वाला रहा, जहां 100 पदों के लिए आयोजित परीक्षा में महज 15 अभ्यर्थी ही सफल हो सके।
यह परीक्षा 22 फरवरी को प्रदेशभर में आयोजित की गई थी, जिसमें कुल 1433 उम्मीदवार शामिल हुए थे। बोर्ड ने रिकॉर्ड समय में महज एक महीने के भीतर 21 मार्च को परिणाम घोषित कर दिए, जिसमें कुल 1249 अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण घोषित किया गया। लेकिन नॉन-मेडिकल विषय के नतीजों ने सभी को हैरान कर दिया। इस श्रेणी में 102 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी, लेकिन केवल 15 ही पास हो पाए, जबकि बाकी सभी उम्मीदवार इस अपेक्षाकृत आसान मानी जा रही परीक्षा में भी असफल रहे।
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इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 1427 पदों को भरा जाना था, जिसके लिए 23 दिसंबर से 15 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए थे। कुल 1534 आवेदन प्राप्त हुए थे, लेकिन 97 अभ्यर्थियों ने फीस जमा नहीं करवाई, जिससे वे प्रक्रिया से बाहर हो गए।
अन्य विषयों में स्थिति अपेक्षाकृत संतोषजनक रही। आर्ट्स में 284 पदों के मुकाबले 294 अभ्यर्थी पास हुए, हिंदी में 343 पदों पर 341, संस्कृत में 283 पदों पर 266, मेडिकल में 104 पदों पर सभी 104 अभ्यर्थी पास हुए, जबकि ड्राइंग मास्टर और जेबीटी में भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की। शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा ने बताया कि परीक्षा ओएमआर शीट पर आयोजित की गई थी और परिणाम रिकॉर्ड समय में घोषित किए गए हैं। उन्होंने इसे बोर्ड की बड़ी उपलब्धि बताया।
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हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता और युवाओं की तैयारी को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक ओर जहां बेरोजगार युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के परिणाम यह संकेत दे रहे हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अभ्यर्थियों की तैयारी अपेक्षित स्तर की नहीं है। इस घटना ने यह भी सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रदेश के युवा पर्याप्त मार्गदर्शन और संसाधनों के अभाव में पीछे रह रहे हैं, या फिर शिक्षा प्रणाली में ही कहीं न कहीं सुधार की जरूरत है। फिलहाल, यह मामला पूरे हिमाचल में चर्चा का विषय बना हुआ है।