#अपराध

August 2, 2026

हिमाचल के अफसर और कर्मियों ने किया मनरेगा में घोटाला- 55 लाख डकारे, FIR दर्ज

फर्जी रिकॉर्ड बनाकर भुगतान लेने का आरोप, हर पहलू की हो रही जांच

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MGNREGA Scam Vigilance Bureau Forest Department Corruption Himachal Chamba

चंबा। हिमाचल प्रदेश में मनरेगा कार्यों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर विजिलेंस ने बड़ी कार्रवाई की है। चंबा जिले में सरकारी रिकॉर्ड में फर्जी कार्य और सामग्री दिखाकर लाखों रुपये के गबन के आरोप में वन विभाग के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। 

वन विभाग के कर्मियों के खिलाफ FIR

मामले में करोड़ों नहीं, बल्कि योजनाओं के नाम पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की परतें खुलने लगी हैं और अब विजिलेंस पूरे भुगतान रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। विजिलेंस ने तत्कालीन वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच तेज कर दी है।

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55 लाख का सरकारी धन गबन

आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में फर्जी कार्य और निर्माण सामग्री का उल्लेख कर करीब 55 लाख रुपये के सरकारी धन का गबन और दुरुपयोग किया गया। इस मामले में तत्कालीन रेंज अधिकारी, ब्लॉक अधिकारी, फॉरेस्ट गार्ड और अन्य संबंधित कर्मचारियों को जांच के दायरे में लिया गया है।

इन धाराओं में दर्ज हुई FIR

विजिलेंस ने आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 409, 420, 467, 468, 471 और 120-B के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) सहपठित 13(1)(A) के तहत मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी अब रिकॉर्ड, भुगतान प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

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शिकायत से खुला पूरा मामला

यह मामला वर्ष 2022 में मिली दो शिकायतों की जांच के बाद सामने आया। शिकायतें पूर्व जिला परिषद सदस्य कर्मचंद ठाकुर और अन्य ग्रामीणों ने दर्ज करवाई थीं। शुरुआती शिकायत वर्ष 2019 में की गई थी, जिसमें भारी बर्फबारी के बाद देवदार के पेड़ों के कथित अवैध कटान और मनरेगा कार्यों में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे।

41 कार्यों की जांच, 32 में मिली गड़बड़ी

शिकायत मिलने के बाद उपायुक्त चंबा ने जांच जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) को सौंपी। डीआरडीए की तकनीकी समिति ने वन परिक्षेत्र तीसा, मसरूंड और टिकरीगढ़ में मनरेगा के तहत कराए गए 41 कार्यों का निरीक्षण किया। जांच में 32 कार्यों में गंभीर तकनीकी और वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं।

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रिकॉर्ड में खर्च, मौके पर नहीं मिली सामग्री

जांच रिपोर्ट के अनुसार कई परियोजनाओं में सामग्री मद के तहत लाखों रुपये का भुगतान दिखाया गया, लेकिन मौके पर संबंधित सामग्री या तो इस्तेमाल ही नहीं की गई या रिकॉर्ड में दर्शाए गए कार्य की तुलना में काफी कम मिली।

 

रिपोर्ट में तीसा रेंज के सीओ लैंड डेवलपमेंट वर्क एट गुवाड़ी सेकेंड का भी उल्लेख है, जहां सामग्री मद में 1.96 लाख रुपये खर्च दिखाए गए, जबकि पुनर्मूल्यांकन के दौरान सामग्री का उपयोग शून्य पाया गया।

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फर्जी रिकॉर्ड बनाकर भुगतान लेने का आरोप

विजिलेंस के अनुसार दस्तावेजों, तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट और अधिकारियों के बयानों से प्रथम दृष्टया यह सामने आया है कि आपराधिक षड्यंत्र के तहत सरकारी अभिलेखों में वास्तविक कार्य से अधिक काम दर्शाकर फर्जी रिकॉर्ड तैयार किए गए। इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर सरकारी भुगतान जारी कराया गया। फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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