#यूटिलिटी
July 27, 2026
हिमाचल में 4 दिन भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी, कई जिलों में फ्लैश फ्लड बढ़ाएगा मुश्किलें
बारिश बढ़ने के साथ तापमान में आएगा बड़ा बदलाव
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन दिनों से बारिश की रफ्तार थमने से लोगों ने राहत की सांस जरूर ली है, लेकिन यह राहत ज्यादा दिनों तक रहने वाली नहीं है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 28 जुलाई यानी कल से एक बार फिर स्ट्रांग वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है, जिसके प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
इसे देखते हुए कल से 31 जुलाई तक अलग-अलग जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों से नदी-नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और पहाड़ी ढलानों से दूर रहने की अपील की है।
आज यानी 27 जुलाई को बिलासपुर, मंडी, सोलन और सिरमौर जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं कल से मौसम पूरी तरह करवट लेगा। इस दिन मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट रहेगा, जबकि बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा में येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने मैदानी क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की आशंका भी जताई है।
29 जुलाई को ऊना, कांगड़ा और सिरमौर जिलों में ऑरेंज अलर्ट रहेगा। चंबा, मंडी, सोलन और शिमला में येलो अलर्ट जारी किया गया है। 30 जुलाई को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा और कांगड़ा में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट रहेगा, जबकि कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर में येलो अलर्ट रहेगा।
31 जुलाई को भी प्रदेश के मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में एक अगस्त तक बारिश का दौर जारी रह सकता है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 25 जुलाई तक प्रदेश में सामान्य से करीब 7 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इस अवधि में सामान्य वर्षा 312 मिलीमीटर होती है, जबकि इस बार अब तक 288.9 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। हालांकि अगले कुछ दिनों में होने वाली बारिश इस कमी को काफी हद तक पूरा कर सकती है।
पिछले तीन दिनों तक कम बारिश रहने के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। मगर 28 जुलाई से बारिश बढ़ने के साथ तापमान में गिरावट शुरू होगी और अधिकांश शहरों का अधिकतम तापमान सामान्य से दो से तीन डिग्री नीचे पहुंच सकता है।