#राजनीति
August 7, 2026
CM सुक्खू ने अपने चहेतों को बांटे सरकारी बंगले...हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, मांगा जवाब
सुक्खू सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सुक्खू सरकार को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों (CPS) को सरकारी आवास आवंटित किए जाने के मामले में राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन लोगों की नियुक्तियां पहले ही रद्द हो चुकी हैं और जिन्होंने सरकारी आवास के लिए आवेदन तक नहीं किया- उन्हें आखिर किस आधार पर सरकारी बंगलों में रहने की अनुमति दी गई। कोर्ट ने इस मामले में मुख्य सचिव को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
चीफ जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया और जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से कई अहम सवाल पूछे। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे नियम व्यक्ति को देखकर बनाए जा रहे हों- न कि सभी के लिए समान रूप से लागू किए जा रहे हों।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य आया कि पूर्व CPS ने सरकारी आवास के लिए कोई औपचारिक आवेदन नहीं किया था। इसके बावजूद राज्य सरकार ने 4 मई, 2026 को आदेश जारी कर उनके सरकारी आवास में रहने को नियमित कर दिया। सरकार ने यह फैसला सरकारी आवास आवंटन (जनरल पूल) नियम, 1994 के नियम-24 के तहत विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए लिया। फिर 14 नवंबर 2024 से सामान्य लाइसेंस शुल्क पर उनके प्रवास को नियमित कर दिया।
हाईकोर्ट ने इस फैसले पर गंभीर आपत्ति जताते हुए राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि पूर्व CPS को विशेष छूट देने वाले 4 मई, 2026 के आदेश पर रोक क्यों न लगाई जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर इस मामले में समय रहते नोटिस जारी नहीं किया जाता तो संभव है कि पूरा मामला दबा दिया जाता।
यह विवाद वर्ष 2023 में शुरू हुआ था- जब प्रदेश सरकार ने कांग्रेस के छह विधायकों को मुख्य संसदीय सचिव नियुक्त किया था। इनमें सुंदर सिंह ठाकुर, मोहन लाल ब्राक्टा, संजय अवस्थी, आशीष बुटेल, राम कुमार चौधरी और किशोरी लाल शामिल थे। इन नियुक्तियों को भाजपा और अन्य याचिकाकर्ताओं ने संविधान के प्रावधानों के विपरीत बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हिमाचल हाईकोर्ट ने 13 नवंबर, 2024 को सभी छह मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्तियों को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया था। अदालत ने सरकार को उनसे सभी सरकारी सुविधाएं वापस लेने का भी निर्देश दिया था। बाद में 22 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के कुछ हिस्सों पर अंतरिम राहत दी, लेकिन मुख्य संसदीय सचिव का पद बहाल नहीं किया गया।
अब हाईकोर्ट इस मामले में सरकारी आवासों के आवंटन और उन्हें नियमित किए जाने की प्रक्रिया की वैधता की भी जांच कर रहा है। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को निर्धारित की गई है।