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March 10, 2026
हिमाचल में ठगी पर लगेगी लगाम : पुलिस ने निकाला नया रूल, साइबर थाने में दर्ज होगी FIR
1930 हेल्पलाइन पर कॉल कर सकते हैं पीड़ित
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस विभाग ने जांच व्यवस्था में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब साइबर ठगी से जुड़े मामलों को रकम के आधार पर अलग-अलग स्तर पर दर्ज और जांच किया जाएगा।
20 लाख रुपये से कम की साइबर ठगी के मामलों की जांच संबंधित जिला पुलिस करेगी, जबकि इससे अधिक राशि वाले मामलों को राज्य के साइबर थाने में दर्ज कर विशेषज्ञ टीम द्वारा जांच की जाएगी।
पुलिस विभाग का मानना है कि इस नई व्यवस्था से जांच प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा और पीड़ितों को जल्द राहत मिल सकेगी। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में ऑनलाइन ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे पुलिस को मामलों के निपटारे के लिए अलग रणनीति अपनानी पड़ी है।
प्रदेश में साइबर ठगी के कई नए तरीके सामने आ रहे हैं। ठग कभी बैंक अधिकारी बनकर फोन करते हैं, तो कभी निवेश योजनाओं, इनाम, लोन या केवाईसी अपडेट के नाम पर लोगों को झांसे में लेते हैं। कई मामलों में लोगों को फर्जी लिंक भेजकर उनकी बैंकिंग जानकारी हासिल कर ली जाती है। इसके बाद कुछ ही मिनटों में खातों से बड़ी रकम निकाल ली जाती है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कई मामलों में ठगी की रकम हजारों से लेकर लाखों रुपये तक पहुंच रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आने से जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही थी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब 20 लाख रुपये से कम राशि वाले साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों को अपने जिले के पुलिस थाने या साइबर सेल से संपर्क करना होगा। जिला पुलिस इन मामलों की एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करेगी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिला स्तर पर कार्रवाई होने से मामलों की जांच में तेजी आएगी और पीड़ितों को लंबी प्रक्रिया से गुजरना नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही जिला पुलिस को साइबर अपराधों की जांच के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है, जिससे वे तकनीकी पहलुओं को समझकर प्रभावी कार्रवाई कर सकें।
यदि साइबर ठगी की रकम 20 लाख रुपये से अधिक होती है, तो ऐसे मामलों की एफआईआर राज्य के साइबर थाने में दर्ज की जाएगी। बड़े मामलों में अक्सर कई राज्यों या देशों तक फैले गिरोह शामिल होते हैं, जिनकी जांच के लिए उन्नत तकनीकी संसाधनों और विशेषज्ञ टीम की आवश्यकता होती है।
साइबर थाने में डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की ट्रैकिंग और तकनीकी जांच अधिक गहराई से की जाती है। इसलिए बड़े मामलों को वहीं दर्ज कर विशेषज्ञों की निगरानी में जांच आगे बढ़ाई जाती है।
पुलिस विभाग ने आम लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अनजान कॉल, संदेश या लिंक पर भरोसा न करें और अपनी बैंकिंग डिटेल्स, OTP, पासवर्ड आदि किसी के साथ भी शेयर ना करें।
अगर किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी की घटना होती है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से कई मामलों में ठगी गई राशि को रोका या वापस दिलाया जा सकता है।
साइबर क्राइम के IG रोहित मालपानी ने बताया कि साइबर अपराध के मामलों को प्रभावी ढंग से निपटाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। उनके अनुसार अब 20 लाख रुपये से कम की साइबर ठगी के मामलों की जांच जिला पुलिस करेगी।
जबकि इससे अधिक राशि वाले मामलों को साइबर थाने में दर्ज कर विशेषज्ञ टीम द्वारा जांच की जाएगी। पुलिस का मानना है कि इस व्यवस्था से जांच प्रक्रिया तेज होगी और साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत किया जा सकेगा।