#अपराध
August 20, 2026
हिमाचल : फोन के चक्कर में इकलौते बेटे की मौ**त, मां की डांट से हुआ था नाराज
माता-पिता दिहाड़ी-मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाते हैं
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से एक सनसनीखेज खबर सामने आई है। धर्मशाला के खनियारा क्षेत्र में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। यहां रक्कड़ में मोबाइल गेम खेलने से रोकने और पढ़ाई करने के लिए कहे जाने के बाद 14 वर्षीय किशोर ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।
किशोर ने घर की रसोई में फंदा लगा लिया। घटना के बाद परिवार में मातम पसर गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।वहीं, पूरे क्षेत्र में भी गम का माहौल है।
जानकारी के मुताबिक, किशोर घर पर मोबाइल फोन में गेम खेल रहा था। परिजनों ने उसे काफी देर तक मोबाइल चलाते देख फोन अपने पास रख लिया और पढ़ाई करने के लिए कहा। बताया जा रहा है कि इस बात से किशोर नाराज हो गया और वहां से उठकर घर की रसोई में चला गया।
कुछ समय बीतने के बाद जब परिजनों ने उसकी तलाश की तो वह रसोई में फंदे से लटका हुआ मिला। किशोर को इस हालत में देखकर परिवार के लोगों के होश उड़ गए। घर में चीख-पुकार मच गई। परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सक उसे बचा नहीं सके।
किशोर अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी दो बहनें भी हैं। बताया जा रहा है कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है और माता-पिता दिहाड़ी-मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाते हैं। इकलौते बेटे की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भी शोक का माहौल है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। धर्मशाला के जोनल अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है। पुलिस ने परिवार के सदस्यों के बयान भी दर्ज किए हैं और घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
फिलहाल पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि किशोर ने इतना बड़ा कदम किन परिस्थितियों में उठाया। शुरुआती जानकारी में मोबाइल गेम खेलने को लेकर परिजनों द्वारा रोकने और पढ़ाई के लिए कहे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, घटना के पीछे की पूरी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
यह घटना बच्चों में मोबाइल फोन और ऑनलाइन गेमिंग के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर अभिभावकों के लिए भी गंभीर चिंता पैदा करती है। मोबाइल और गेमिंग बच्चों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। मगर अत्यधिक इस्तेमाल का असर उनके व्यवहार और पढ़ाई पर पड़ सकता है।
ऐसे मामलों में विशेषज्ञ आमतौर पर अभिभावकों को बच्चों से बातचीत बनाए रखने, उनकी दिनचर्या समझने और मोबाइल इस्तेमाल के लिए स्पष्ट लेकिन संतुलित नियम तय करने की सलाह देते हैं। बच्चों को अचानक डांटने या पूरी तरह मोबाइल से दूर करने के बजाय उनकी बात सुनना और उन्हें समझाकर समय-सीमा तय करना अधिक प्रभावी हो सकता है।
धर्मशाला के खनियारा क्षेत्र की इस घटना ने एक परिवार से उसका इकलौता बेटा छीन लिया है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस दुखद कदम के पीछे मोबाइल गेमिंग के अलावा कोई अन्य वजह भी थी या नहीं।