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December 24, 2025

विमल नेगी केस में मुख्य आरोपी IAS मीणा को कोर्ट से जमानत, पत्नी ने किया विरोध

3 दिसंबर को सुरक्षित रखा गया था फैसला

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शिमला हिमाचल प्रदेश के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में शामिल चीफ इंजीनियर विमल नेगी मौत केस में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में आरोपी बनाए गए आईएएस अधिकारी हरिकेश मीणा को अंतरिम जमानत दे दी है। लंबे समय से प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा में रहे इस केस में हाईकोर्ट का यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।

दिसंबर को सुरक्षित रखा गया था फैसला

इस मामले में हाईकोर्ट ने 3 दिसंबर को हरिकेश मीणा की अंतरिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह की अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मीणा की याचिका को स्वीकार कर लिया।

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सरकार के बाद CBI बनी पक्षकार

मामले की सुनवाई के दौरान पहले राज्य सरकार अदालत में पेश हुई, जिसके बाद सीबीआई को भी औपचारिक रूप से पक्षकार बनाया गया। अदालत ने सीबीआई द्वारा प्रस्तुत केस डायरी (वॉल्यूम-1) को रिकॉर्ड पर लेते हुए उसे न्यायिक दस्तावेज का हिस्सा बनाया।

मीणा की ओर से क्या दलीलें दी गईं

IAS अधिकारी हरिकेश मीणा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत में जोरदार दलीलें रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को बिना ठोस सबूतों के मामले में फंसाया जा रहा है।

 

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उन्होंने दावा किया कि मृतक विमल नेगी पिछले कई वर्षों से डिप्रेशन से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। अधिवक्ता ने सीबीआई की ओर से पेश स्टेटस रिपोर्ट को भी तथ्यों के विपरीत बताते हुए उसका खंडन किया।

CBI ने जमानत का किया विरोध

वहीं सीबीआई की ओर से अदालत में केस रिकॉर्ड पेश किया गया और दलील दी गई कि आरोपी को पूछताछ के लिए हिरासत में रखना जरूरी है। सीबीआई ने अंतरिम जमानत याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि जांच अभी संवेदनशील चरण में है।

मृतक की पत्नी का पक्ष: दबाव और भ्रष्टाचार के आरोप

मृतक विमल नेगी की पत्नी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पेखुवाला प्रोजेक्ट की समय-सीमा बढ़ाने और फंड जारी करने को लेकर विमल नेगी पर लगातार दबाव डाला गया।

 

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उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रोजेक्ट में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ और इसी कारण विमल नेगी को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उन्होंने कहा कि यदि मृतक मानसिक तनाव में थे, तो इसका यह मतलब नहीं कि संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच जाएं।

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