#अपराध
March 10, 2026
हिमाचल में बड़ा रिश्वत कांड उजागर: NHAI अधिकारी ने 10 लाख रुपए मांगी रिश्वत; CBI कर रही जांच
पीड़ित की शिकायत पर सीबीआई ने दर्ज किया अधिकारी पर केस
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शिमला। शिमला। हिमाचल प्रदेश के शांत वादियों में भ्रष्टाचार का एक ऐसा तूफान उठा है जिसने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की साख पर गहरा दाग लगा दिया है। यह कहानी किसी फिल्मी विलेन की नहीं, बल्कि सिस्टम में बैठे एक रसूखदार अधिकारी की है, जिसने एक छोटे कारोबारी का गला घोटने के लिए अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल किया।
एनएचएआई के एक परियोजना निदेशक ने एक पेट्रोल पंप मालिक से 10 लाख रुपए की रिश्वत मांग ली। यह रिश्वत पेट्रोल पंप को नेशनल हाईवे से जोड़ने की एनओसी देने की एवज में मांगी गई थी। पीड़ित की शिकायत पर सीबीआई ने एनएचएआई के एक परियोजना निदेशक पर केस दर्ज किया है। जबकि चंडीगढ़ की एक महिला आर्किटेक्ट को भी इसमें आरोपी बनाया गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार मामला कांगड़ा जिले के नूरपुर क्षेत्र से जुड़ा है। यहां पेट्रोल पंप चलाने वाले ईशान धींगरा ने शिकायत दर्ज कराई कि हाईवे से पंप को जोड़ने की अनुमति के बदले उनसे भारी रकम मांगी जा रही थी। आरोप है कि एनएचएआई के परियोजना निदेशक विकास सुरजेवाला ने निरीक्षण के दौरान ही संकेत दे दिया था कि बिना बड़ी रकम दिए काम आगे नहीं बढ़ेगा।
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शिकायत के मुताबिक निरीक्षण के दौरान अधिकारी ने पंप मालिक को कड़े शब्दों में चेतावनी दी थी। कहा गया कि यदि उनकी शर्तें नहीं मानी गईं तो पेट्रोल पंप की हाईवे अनुमति रद्द कर दी जाएगी। इससे कारोबार पूरी तरह ठप हो सकता था। इस दबाव के बीच पीड़ित को चंडीगढ़ की एक आर्किटेक्ट से संपर्क करने के लिए कहा गया।
बताया जा रहा है कि चंडीगढ़ की आर्किटेक्ट सीमा राजपाल को इस पूरे मामले में बिचौलिये के रूप में सामने लाया गया। पीड़ित की उनसे पालमपुर कार्यालय में मुलाकात कराई गई। आरोप है कि उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अधिकारी से उनकी पूरी बातचीत हो चुकी है और काम करवाने के लिए 10 लाख रुपये का इंतजाम करना पड़ेगा।
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मामले में यह भी सामने आया कि दबाव बनाने के लिए पेट्रोल पंप के सामने की जमीन तक खुदवा दी गई। बताया गया कि करीब 28 मीटर तक खुदाई कर ईंधन सप्लाई रोकने की स्थिति पैदा कर दी गई। इससे पंप संचालक पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ गया।
जांच में यह भी सामने आया कि रिश्वत की पूरी रकम एक साथ देने के बजाय किस्तों में लेने की योजना बनाई गई थी। शुरुआती सहमति के अनुसार पहली किस्त के रूप में 5 लाख रुपये देने की बात तय हुई थी।
शिकायत मिलने के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत केस दर्ज कर लिया है। अब जांच एजेंसी पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल कर रही है और इस मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
इस खुलासे के बाद प्रदेश में सरकारी व्यवस्था और परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ जहां भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही जाती है, वहीं ऐसे मामलों के सामने आने से व्यवस्था की पारदर्शिता पर फिर बहस शुरू हो गई है।