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April 5, 2026

हिमाचल में वाहन रजिस्ट्रेशन घोटाला : सरकारी सिस्टम से छेड़छाड़, ऑफिस क्लर्क समेत 6 अरेस्ट

सरकारी दफ्तर के बाहर बैठकर सिस्टम में लॉगिन

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RLA Scam

सोलन। हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन में वाहन रजिस्ट्रेशन से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की जांच में पता चला है कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं, बल्कि संगठित तरीके से किया जा रहा घोटाला था, जिसमें सरकारी रिकॉर्ड तक से छेड़छाड़ की गई। इस मामले में पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 

रिकॉर्ड में सामने आई कुछ गड़बड़ियां 

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब आरएंडएलए सोलन के रिकॉर्ड में कुछ संदिग्ध एंट्री सामने आईं। इसके बाद अधिकारी डॉ. पूनम बंसल ने 26 जनवरी 2026 को शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की और एक विशेष टीम का गठन किया।

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गाड़ियों के कागज़ों में बड़ा घोटाला

जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि आरोपियों ने सीधे सरकारी वाहन पोर्टल को ही निशाना बनाया। उन्होंने अधिकारियों के नाम पर फर्जी यूजर आईडी तैयार कीं, जिनमें SDM डॉ. पूनम के नाम तक का इस्तेमाल किया गया। इन फर्जी आईडी के जरिए गाड़ियों की वेरिफिकेशन और अप्रूवल की प्रक्रिया पूरी कर दी जाती थी, जबकि असल में कोई सही जांच ही नहीं की जाती थी। 

तैयार कर रखा था एजेंटों का एक नेटवर्क

पुलिस जांच में यह भी पता चला कि इस पूरे खेल का मुख्य आरोपी क्लर्क गौरव भारद्वाज है, जिसने अपने साथ एजेंटों का एक नेटवर्क तैयार कर रखा था। इस नेटवर्क में कई लोग शामिल थे, जो गाड़ी मालिकों से संपर्क करते थे और पैसे लेकर उनके कागज़ “ठीक” कर देते थे।

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सरकारी दफ्तर के बाहर बैठकर सिस्टम में लॉगिन

पुलिस को तकनीकी जांच के दौरान कई अहम सबूत मिले हैं, जैसे आईपी लॉग्स, ओटीपी रिकॉर्ड और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)। इन सबूतों से यह साफ हो गया कि आरोपी सरकारी दफ्तर के अंदर नहीं, बल्कि बाहर बैठकर सिस्टम में लॉगिन कर रहे थे और रिकॉर्ड में बदलाव कर रहे थे।

बैंक खातों में करोड़ों के हुए लेन-देन

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि आरोपी के बैंक खातों में करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ है। इससे साफ हो गया कि यह काम लंबे समय से और बड़े स्तर पर चल रहा था। यानी यह सिर्फ एक-दो केस नहीं, बल्कि पूरी तरह से सेट किया गया रैकेट था।

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6 आरोपी गिरफ्तार 

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया। टीम ने तकनीकी जांच और साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क को ट्रैक किया। इसके बाद 3 अप्रैल को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपियों की पहचान

  • जितेंद्र ठाकुर चंडी, कसौली, सोलन
  • अनिल कुमार मुकराना, झंडूता, बिलासपुर
  • राज कुमार ढठवाड़ा, ऊना
  • जितेंद्र कुमार तुनाई, सुंदरनगर, मंडी
  • नरेश कुमार बोह, सदर, बिलासपुर
  • विकास सिंह उर्फ शालू करोह, नूरपुर, कांगड़ा के रुप में हुई हैं।

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आरोपियों से पूछताछ जारी

पुलिस जांच में सामने आया है कि ये सभी अलग-अलग जिलों से जुड़े हुए हैं और मिलकर इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे थे। सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

पुलिस कर रही मामले की गहन जांच 

सभी आरोपियों को 4 अप्रैल कोर्ट में पेश किया जा रहा है। फिलहाल पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है और यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। SP सोलन टी साई दत्तात्रेय वर्मा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। साथ ही, जो भी इस घोटाले में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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