#अपराध
August 4, 2025
हिमाचल: खत्म हुई 23 वर्षीय तनुज की तलाश, लावारिस की तरह 4 माह पहले हो गया था अंतिम संस्कार
पिता चार माह से दर दर भटक रहा था, बेटे का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाया
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नाहन। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला से लापता हुए 23 वर्षीय तनुज की तलाश आखिरकार एक ऐसी हकीकत पर आकर थम गई, जिसने उसके परिवार को अंदर तक तोड़ दिया। तनुज जो 11 अप्रैल को अचानक लापता हो गया था, उसी दिन इस दुनिया को अलविदा कह चुका था। लेकिन इस मौत की खबर उसके परिवार को पूरे चार महीने बाद मिली। इतनी देर से, कि एक पिता अपने बेटे की चिता तक को मुखाग्नि नहीं दे पाया।
तनुज के लापता होने के दिन हरियाणा के नारायणगढ़ में एक पेट्रोल पंप के शौचालय से एक अज्ञात युवक का शव बरामद हुआ था। शव के पास नशीले पदार्थ और एक सिरिंज मिलने से पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर नशे की ओवरडोज को मौत का कारण माना। चूंकि शव की पहचान नहीं हो सकी, उसे लावारिस मानकर बिना परिजनों की जानकारी के अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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यहां तक कि तनुज के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज करने और सीसीटीवी से उसकी आखिरी तस्वीर मिलने के बाद भी परिजनों को तनुज की मौत की सूचना नहीं मिल सकी। वजह एक तकनीकी चूक रही। नारायणगढ़ पुलिस ने अज्ञात शव की सूचना जिस डेड पोर्टल पर डालनी थी, वह गलती से किसी और पोर्टल पर अपलोड कर दी। इस मानवीय त्रुटि ने तनुज की पहचान के सारे रास्ते बंद कर दिए।
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तनुज के पिता का दर्द शब्दों से परे है। बेटे के लापता होने के बाद उन्होंने हर दरवाज़ा खटखटाया पुलिस स्टेशन, अस्पताल, मीडिया तक गए। लेकिन हर ओर सन्नाटा ही मिला। रविवार 3 अगस्त को जब परिवार ने मीडिया से अपनी व्यथा साझा की, तब जाकर पुलिस प्रशासन हरकत में आया। डीएसपी रमाकांत ठाकुर के नेतृत्व में एक टीम नारायणगढ़ पहुंची और वहां दर्ज लावारिस शवों का रिकॉर्ड खंगालने लगी। यहीं से तनुज के कपड़े और तस्वीर से शव की पहचान हुई।
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अब हरियाणा पुलिस को यह तय करना है कि डीएनए जांच आवश्यक है या नहीं। हालांकि परिजनों ने कपड़ों और तस्वीर से शव की पुष्टि कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार अभी बाकी है, जो यह साफ़ कर सकेगी कि मौत वाकई ओवरडोज से हुई या कोई और वजह थी।
इस पूरी घटना में कई सवाल अनुत्तरित हैं, तनुज नाहन से नारायणगढ़ तक कैसे पहुंचा? उसके पास नशीले पदार्थ कहां से आए? क्या वह किसी गिरोह का शिकार हुआ? और सबसे महत्वपूर्ण, यदि पुलिस व्यवस्था थोड़ा संवेदनशील होती, तो क्या एक पिता अपने बेटे का अंतिम संस्कार कर पाता?
एसपी सिरमौर एनएस नेगी ने स्वीकार किया कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण चूक रही। उन्होंने कहा यदि पहले से थोड़ी अधिक संवेदनशीलता बरती जाती, तो शायद परिवार को इतनी लंबी पीड़ा नहीं झेलनी पड़ती।