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February 16, 2026

हिमाचल: फर्जी प्रमाणपत्रों से HPU में प्रोफेसर बन गया व्यक्ति, दो साल से कर रहा था नौकरी

28 सितंबर 2024 को प्रोफेसर नियुक्ति पत्र हुआ जारी

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Fake Certificates

शिमला। शिक्षक समाज का वह स्तंभ होते हैं, जो विद्यार्थियों को ईमानदारी, सत्य और नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं। लेकिन जब शिक्षा देने वाला ही नियमों को ताक पर रख दे, तो यह न सिर्फ व्यवस्था पर बल्कि समाज के विश्वास पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। ऐसा ही चौंकाने वाला मामला जिला शिमला से सामने आया है, जहां हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में तैनात एक सहायक प्रोफेसर के शैक्षणिक प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं।

28 सितंबर 2024 को प्रोफेसर नियुक्ति पत्र हुआ जारी

बताया जा रहा है कि नियुक्ति के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों के सत्यापन में गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। यह घटना प्रदेश की सबसे बड़ी उच्च शिक्षण संस्था में हुई है, जिससे शिक्षा व्यवस्था की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।

 

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यह खुलासा तब हुआ जब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने नियुक्ति के समय जमा किए गए दस्तावेजों की नियमित जांच करवाई। जानकारी के अनुसार, संबंधित सहायक प्रोफेसर को 28 सितंबर 2024 को नियुक्ति पत्र जारी हुआ था और उन्होंने ज्वाइनिंग के समय अपने सभी शैक्षणिक प्रमाणपत्र जमा करवाए थे।

 सत्यापन के लिए भेजे सर्टिफिकेट

इसके बाद उन्होंने 30 सितंबर 2024 को जॉइन कर लिया था। जॉइनिंग के समय उन्होंने अपने सभी शैक्षणिक सर्टिफिकेट यूनिवर्सिटी में जमा करवाए थे। इनमें 12वीं (सीनियर सेकेंडरी) का सर्टिफिकेट भी शामिल था। नियम के मुताबिक इन सर्टिफिकेट्स की संबंधित बोर्ड से जांच होनी जरूरी थी।

 

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नंबरों में दिखी गड़बड़ 

इसी प्रक्रिया के तहत यूनिवर्सिटी ने उनके सर्टिफिकेट राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) को सत्यापन के लिए भेजे। जांच के दौरान सामने आया कि जो नंबर सर्टिफिकेट में लिखे गए थे, वे बोर्ड के असली रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे। कुछ विषयों में अंक अलग थे और रिजल्ट की स्थिति भी रिकॉर्ड से अलग पाई गई।

कारण बताओ नोटिस किया जारी 

बाद में बोर्ड की तरफ से आई रिपोर्ट में भी साफ कर दिया गया कि जमा किया गया सर्टिफिकेट और उनके रिकॉर्ड में फर्क है। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने संबंधित प्रोफेसर को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

 

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ज्ञान सिंह सागर ने कराई शिकायत दर्ज 

मामला सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपनी तरफ से प्राथमिक जांच की और सारे तथ्य इकट्ठा करने के बाद पुलिस को शिकायत भेज दी। रजिस्ट्रार ज्ञान सिंह सागर की ओर से पुलिस थाना बालूगंज में औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई गई।

पुलिस ने किया मामला दर्ज 

SP गौरव सिंह मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद तुरंत FIR दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है। प्रोफेसर के खिलाफ BNS की धारा 318(4), 336(2), 336(3) और 340(2) के तहत केस दर्ज किया गया है।

 

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पुलिस कर रही मामले की जांच 

अब पुलिस कई पहलुओं पर जांच कर रही है। यह देखा जा रहा है कि फर्जी प्रमाणपत्र कहां और किस स्तर पर तैयार किए गए। क्या इसमें किसी एजेंसी या अन्य व्यक्ति की भी भूमिका है, इसकी भी पड़ताल की जाएगी। साथ ही यह भी जांच होगी कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की जांच किस तरह की गई और कहीं कोई लापरवाही तो नहीं हुई।

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