#अपराध
September 20, 2026
हिमाचल में गजब का फ्रॉड : सिम बंद होते ही खाते से कटे 11 लाख, UPI से हुआ लेनदेन
सिम स्वैप या क्लोनिंग की आशंका
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले से साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। चिड़गांव तहसील में एक 65 वर्षीय व्यक्ति के मोबाइल का सिम अचानक बंद हो गया और इसके बाद उसके बैंक खाते से लाखों रुपये के अनधिकृत लेनदेन होने का आरोप है। शिकायतकर्ता के अनुसार, कुछ ही दिनों के भीतर उसके खाते से 11 लाख रुपये से अधिक की रकम 33 अलग-अलग UPI ट्रांजेक्शन के जरिए ट्रांसफर कर दी गई।
पुलिस को दी शिकायत के मुताबिक चिचवाड़ी निवासी दारा सिंह बांशा का खाता चिड़गांव स्थित यूको बैंक में है। उनका दावा है कि 5 सितंबर 2026 को अचानक उनके मोबाइल का सिम काम करना बंद हो गया। सिम बंद होने के बाद उनके मोबाइल पर न तो सामान्य कॉल आ रही थीं और न ही SMS प्राप्त हो रहे थे।
इसी दौरान उनके बैंक खाते से अलग-अलग UPI लेनदेन किए जाने की बात सामने आई। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उन्होंने इनमें से कोई भी भुगतान नहीं किया और न ही किसी अन्य व्यक्ति को अपने खाते से रकम ट्रांसफर करने की अनुमति दी थी।
पुलिस के अनुसार, 5 से 18 सितंबर 2026 के बीच शिकायतकर्ता के खाते से कुल 33 अनधिकृत UPI लेनदेन किए गए। इन सभी ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 11,04,799.61 रुपये खाते से ट्रांसफर होने की शिकायत दर्ज कराई गई है।
पीड़ित ने प्रत्येक लेनदेन से संबंधित जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराई है। इसमें ट्रांजेक्शन की तारीख, UTR या ट्रांजेक्शन आईडी और संबंधित रकम का विवरण शामिल है। इससे पुलिस को लेनदेन की कड़ी को ट्रेस करने में मदद मिल सकती है।
मोबाइल सिम अचानक बंद होने और उसी अवधि में खाते से UPI ट्रांजेक्शन होने के कारण शिकायतकर्ता ने सिम स्वैप या सिम क्लोनिंग की आशंका जताई है। हालांकि, यह अभी केवल शिकायतकर्ता की आशंका है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सिम बंद होने और बैंक खाते से हुए लेनदेन के बीच वास्तविक संबंध क्या था।
साइबर अपराधों में मोबाइल नंबर से जुड़ी सेवाओं के बाधित होने के बाद बैंकिंग या UPI खातों के दुरुपयोग की आशंका को गंभीरता से देखा जाता है। इस मामले में भी पुलिस लेनदेन और संबंधित डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है।
दारा सिंह की शिकायत के आधार पर चिड़गांव पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत में दर्ज जानकारी और उपलब्ध ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि रकम किन खातों में गई और लेनदेन किस माध्यम से किए गए।
मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 के तहत केस दर्ज किया गया है। फिलहाल यह जांच का विषय है कि इस धोखाधड़ी के पीछे कौन लोग हैं और उन्होंने कथित तौर पर बैंकिंग जानकारी या UPI सुविधा तक कैसे पहुंच बनाई।