#अपराध
January 2, 2026
हिमाचल में कॉलेज छात्रा की मौ*त, प्रोफेसर सहित 4 पर लगे आरोप- फोन पर मिली वीडियो, खुली पोल
रैगिंग और यौन उत्पीड़न के आरोपों में प्रोफेसर सहित चार पर FIR
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला स्थित धर्मशाला स्थित गवर्नमेंट कॉलेज की 19 वर्षीय छात्रा पल्लवी की मौत हो गई है। जिसके बाद पूरे शिक्षा तंत्र और छात्र सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। मामला मारपीट, रैगिंग और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोपों तक पहुंच गया है। जिसमें कॉलेज प्रोफेसर सहित 4 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हो गया है।
यह मामला रसना तपोवन सिद्धबाड़ी, धर्मशाला निवासी विक्रम कुमार के बयान पर दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार उनकी बेटी पल्लवी गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज धर्मशाला में द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। पिता का आरोप है कि 18 सितंबर को कॉलेज की तीन छात्राओं हर्षिता, आकृति और कोमोलिका ने पल्लवी के साथ मारपीट की और उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दीं।
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शिकायत में कॉलेज के प्रोफेसर अशोक कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पिता का कहना है कि कथित अशोभनीय हरकतों, अनुचित व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना के चलते उनकी बेटी गहरे तनाव में चली गई थी। परिजनों के अनुसार, घटना के बाद पल्लवी लगातार डरी-सहमी रहती थी और उसकी मानसिक व शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ती गई।
परिजनों ने बताया कि पल्लवी का कई अस्पतालों में इलाज कराया गया। अंततः 26 दिसंबर को लुधियाना स्थित डीएमसी अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पिता ने पुलिस को बताया कि बेटी की गंभीर हालत और पारिवारिक आघात के कारण तत्काल शिकायत दर्ज नहीं करवाई जा सकी।
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परिजनों का दावा है कि पल्लवी ने मौत से पहले अपने मोबाइल फोन में एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। इस वीडियो में उसने प्रोफेसर पर कक्षा और कॉलेज परिसर में अशोभनीय व्यवहार, अनुचित स्पर्श और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। वीडियो में यह भी कहा गया है कि विरोध करने पर उसे डराया और दबाव में रखा गया।
एसपी कांगड़ा अशोक रतन ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75, 115(2), 3(5) और हिमाचल प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (रैगिंग निषेध) अधिनियम, 2009 की धारा 3 के तहत जांच कर रही है। मेडिकल रिकॉर्ड, वीडियो बयान और अन्य साक्ष्यों की हर पहलू से जांच की जा रही है।
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आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रोफेसर अशोक कुमार ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि छात्रा पिछले सत्र में उनके पास पढ़ती थी और मौजूदा सत्र में वह किसी अन्य प्रोफेसर के अधीन थी। उन्होंने घटना को दुखद बताते हुए स्वयं को स्तब्ध बताया।
मामले के सामने आने के बाद छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों में गहरा आक्रोश है। संगठनों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कॉलेज प्रशासन की भूमिका की भी जांच की मांग उठाई है।