#अपराध

May 11, 2026

हिमाचल: 10वीं में कंपार्टमेंट आने से टूट गया 15 वर्षीय अमन, रिजल्ट देख उठाया गलत कदम- हुई मौ*त

रिजल्ट के बाद परेशान था अमन

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Jhaduuta, Bilaspur

बिलासपुर। जिंदगी में उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है, लेकिन सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण समय वह होता है जब इसका सामना विद्यार्थी जीवन में करना पड़ता है। परीक्षा के परिणाम कई बार उम्मीद के मुताबिक नहीं आते, जिससे कुछ छात्र निराश हो जाते हैं। दुर्भाग्य से, कुछ बच्चे इस असफलता को इतना भारी मान लेते हैं कि वे गलत और बेहद कठोर कदम उठा लेते हैं।

छात्र ने की आत्महत्या

ऐसा ही एक दुखद मामला जिला बिलासपुर से सामने आया है, जहां परीक्षा में असफल होने से आहत एक छात्र ने आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बच्चों पर पढ़ाई और परिणामों का दबाव किस हद तक बढ़ता जा रहा है।

 

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रिजल्ट के बाद परेशान था अमन

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला जिला बिलासपुर के जड्डू कुलज्यार पंचायत के ठठल जंगल क्षेत्र से सामने आया है। बीते रविवार को 10वीं कक्षा का परिणाम घोषित किया गया था। इसी रिजल्ट में अमन कुमार, जो ठठल क्षेत्र का रहने वाला था, का परिणाम भी आया था। बताया जा रहा है कि परिणाम आने के बाद वह मानसिक रूप से काफी परेशान था। मृतक की पहचान अमन उम्र 15 साल, पुत्र पप्पू राम जिला बिलासपुर के रूप मे हुई है। 

फंदा लगाकर की आत्महत्या

परिवार और आसपास के लोगों के मुताबिक, रिजल्ट आने के बाद से ही वह चुपचाप रहने लगा था और ज्यादा किसी से बात नहीं कर रहा था। इसी मानसिक दबाव के चलते उसने घर के पास ही फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। जब परिवार को इस बात का पता चला तो वहां चीख-पुकार मच गई और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

 

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पोस्टमार्टम के लिए भेज के लिए भेजा शव 

गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं और किसी को भी यकीन नहीं हो रहा कि इतनी कम उम्र में एक बच्चा इतना बड़ा कदम उठा सकता है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस थाना तलाई की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की आगे की जांच शुरू कर दी है।

 

नोट: प्रिय बच्चों, एक परीक्षा, एक रिजल्ट या एक कंपार्टमेंट आपकी पूरी जिंदगी तय नहीं करता। असफलता अंत नहीं होती, बल्कि दोबारा उठने का मौका होती है। अगर कभी मन में डर, तनाव या निराशा आए तो अपने माता-पिता, दोस्तों या शिक्षकों से खुलकर बात करें।

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