#अपराध
July 17, 2025
हिमाचल में बड़े फर्जीबाड़े का खुलासा, जाली सर्टिफिकेट से बने कई सरकारी आयुर्वेदिक डॉक्टर
सरकारी नौकरी की दौड़ में अपात्रों ने मारी बाजी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS आरक्षण व्यवस्था की गंभीर साख पर उस वक्त सवाल उठ खड़े हुए जब विजिलेंस जांच में यह खुलासा हुआ कि कई अपात्र उम्मीदवारों ने फर्जी EWS प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी नौकरियां हासिल कर ली हैं। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इनमें से कुछ लोग अब डॉक्टर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात हैं, जिनकी नियुक्ति आयुर्वेदिक विभाग में हुई थी।
जानकारी के अनुसार, इस फर्जीवाड़े में कांगड़ा जिले में सबसे ज्यादा पांच केस, मंडी और हमीरपुर में चार-चार तथा बिलासपुर में एक मामला दर्ज हुआ है। ये नियुक्तियां वर्ष 2022 में बैचवाइज आधार पर की गई थीं। यह मामला उस समय उजागर हुआ जब विजिलेंस को इस संबंध में एक गंभीर शिकायत प्राप्त हुई।
शुरुआती जांच में पाया गया कि कई उम्मीदवारों ने EWS का लाभ पाने के लिए न सिर्फ अपनी पारिवारिक आय को छिपाया, बल्कि कुछ ऐसे भी थे जो पहले से ही किसी सरकारी सेवा में कार्यरत थे। इससे स्पष्ट होता है कि पात्रता मानदंडों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं, जिनमें यह साफतौर पर उल्लेख है कि EWS लाभ सिर्फ उन उम्मीदवारों को मिल सकता है जिनकी पारिवारिक आय सीमित है और परिवार में कोई सरकारी नौकरी में नहीं है।
विजिलेंस ने मंडी, धर्मशाला, हमीरपुर और बिलासपुर जिलों में आयुर्वेदिक विभाग से जुड़े इस फर्जीवाड़े में केस दर्ज कर लिए हैं। सूत्रों के अनुसार अब तक कम से कम तीन मामलों को आगे बढ़ाने की स्वीकृति मिल चुकी है, जिससे स्पष्ट है कि यह जांच अब तेज़ गति से आगे बढ़ेगी और अन्य विभागों में भी संभावित गड़बड़ियों की परतें खुल सकती हैं।
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इस घोटाले में सिर्फ उम्मीदवार ही नहीं, बल्कि वे अधिकारी भी संदेह के घेरे में आ गए हैं जिन्होंने इन फर्जी दस्तावेजों को बिना पर्याप्त जांच के मंज़ूरी दे दी। अब विजिलेंस प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारियों की भी जांच कर रही है और संभावना जताई जा रही है कि कई पर जल्द ही कानूनी शिकंजा कस सकता है।
EWS प्रमाणपत्रों के गलत इस्तेमाल से सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण की पूरी प्रणाली की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। असली ज़रूरतमंद युवा जो सही पात्रता रखते हैं, उन्हें ऐसे फर्जीवाड़ों की वजह से मौके नहीं मिल पाते। यह मामला दर्शाता है कि किस तरह कुछ लोग न केवल नियमों को ताक पर रखकर अपना लाभ सुनिश्चित करते हैं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
विजिलेंस की जांच से एक सख्त संदेश गया है कि इस प्रकार की धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों और उम्मीदवारों दोनों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में अन्य विभागों में भी इस तरह के मामलों की संख्या बढ़ सकती है और कई ऐसे चेहरे सामने आ सकते हैं, जो नियमों की धज्जियां उड़ाकर सरकारी सेवाओं में दाखिल हुए।