#अपराध
March 6, 2026
पूर्व CM जयराम ठाकुर की बढ़ेंगी मुश्किलें! सरेआम कि*डनैपिंग - पि.टाई मामले में हाईकोर्ट ने लिया एक्शन
हिमाचल हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर संभावित आरोपियों से मांगा जवाब
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर एक बड़ी मुश्किल में फंसते हुए दिखने लगे हैं। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व सीएम जयराम ठाकुर के खिलाफ दायर किडनैपिंग और मारपीट के आरोप की याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री और उनके सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को गंभीरता से लेते हुए सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। इस आदेश के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है और माना जा रहा है कि यह मामला आने वाले समय में सियासी तौर पर भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।
यह पूरा मामला 17 अगस्त 2023 की घटना से जुड़ा बताया जा रहा है। उस दिन भारी बारिश और भूस्खलन के कारण नमहोल क्षेत्र में लंबा ट्रैफिक जाम लग गया था। उसी दौरान एचआरटीसी के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी शंकर सिंह ठाकुर सड़क पर लगे जाम का वीडियो अपने मोबाइल फोन से बना रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान जाम में फंसी पूर्व मुख्यमंत्री की गाड़ी के पास जब वह पहुंचे तो वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया और स्थिति अचानक तनावपूर्ण बन गई।
याचिकाकर्ता ने अदालत में लगाए गए आरोपों में कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री के निर्देश पर उनके सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें जबरन गाड़ी में बैठा लिया और उसके बाद चलती गाड़ी के अंदर उनके साथ मारपीट की गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्हें लात-घूंसों से पीटा गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। इस मामले में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री, उनके ड्राइवर, निजी सचिव और कुछ पुलिसकर्मियों पर आपराधिक साजिश और जबरन हमला करने जैसे आरोप लगाए हैं।
पीड़ित का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस चौकी और बरमाणा थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उल्टा आरोपियों की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ ही मामला बना दिया गया। इसके बाद उन्होंने सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से भी न्याय की गुहार लगाई, लेकिन वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
न्याय न मिलने से निराश होकर शिकायतकर्ता ने बिलासपुर की जिला अदालत का रुख किया, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने मामले को हिमाचल हाईकोर्ट में चुनौती दी। अब हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार और संभावित आरोपियों से जवाब तलब किया है।