#अपराध
April 23, 2026
हिमाचल में ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ : पुलिस ने दिल्ली से 22 लाख के चिट्टे संग पकड़ा विदेशी
जेल में बंद साथियों ने बताया ठिकाना- खुली नेटवर्क की पोल
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सोलन। हिमाचल प्रदेश की सोलन जिला पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस टीम ने नशा तस्करी के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
ताजा कार्रवाई में पुलिस टीम ने नई दिल्ली के द्वारका इलाके में दबिश देकर एक नाइजीरियाई नागरिक को हिरासत में लिया। जांच में आरोपी से 229 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) बरामद हुई। पुलिस इस ऑपरेशन को जिले में सक्रिय ड्रग माफिया के खिलाफ अहम सफलता मान रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत लगभग 22 लाख रुपये बताई जा रही है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई की कड़ी 20 अप्रैल 2026 को थाना सदर सोलन में दर्ज एक मामले से जुड़ी है। उस दिन पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 9.93 ग्राम हेरोइन बरामद की थी। पकड़े गए आरोपियों में दो बिहार और एक नेपाल का रहने वाला बताया गया था।

शुरुआती पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्हें यह नशीला पदार्थ दिल्ली से सप्लाई किया गया था। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और सप्लाई नेटवर्क की ऊपरी कड़ियों तक पहुंचने के लिए विशेष टीम का गठन किया।
लगातार तकनीकी और मानवीय इनपुट के आधार पर पुलिस ने आखिरकार द्वारका में आरोपी तक पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान में जुटी है।

संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस की यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
विदित रहे कि, हिमाचल प्रदेश में चिट्टा तस्करी का नेटवर्क अब स्थानीय सीमाओं से निकलकर अंतरराज्यीय रूप ले चुका है। हाल के मामलों से यह साफ हो रहा है कि बाहरी राज्यों के तस्कर यहां सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और संगठित तरीके से युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं।
पुलिस जांच में कई बार सामने आया है कि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और अन्य राज्यों से जुड़े गिरोह हिमाचल के अलग-अलग जिलों में सप्लाई चेन बना चुके हैं। ये तस्कर स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे संपर्क तैयार करते हैं, जो आगे युवाओं तक चिट्टा पहुंचाने का काम करते हैं। खास बात यह है कि कई मामलों में बाहरी नागरिक किराए के मकानों में रहकर या फर्जी पहचान के सहारे लंबे समय तक यहां सक्रिय रहते हैं।
चिंता की बात यह भी है कि ये नेटवर्क अब तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। सोशल मीडिया, ऑनलाइन पेमेंट और गुप्त मैसेजिंग ऐप्स के जरिए सौदे तय किए जा रहे हैं, जिससे पुलिस के लिए ट्रैक करना और चुनौतीपूर्ण हो गया है।
पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है और कई अंतरराज्यीय गिरोहों का भंडाफोड़ भी हुआ है। मगर तस्करों की नई-नई रणनीतियां इस समस्या को जटिल बना रही हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों की सतर्कता बेहद अहम साबित हो रही है