#अपराध
August 7, 2025
हिमाचल : पति 'शेर', पत्नी 'सवाशेर'- घर से ही चिट्टा सप्लाई कर रही थी आशा मैडम, पति पर हैं 11 केस
दोनों पति-पत्नी चिट्टा (हेरोइन) करते थे सप्लाई
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में नशे का कारोबार दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। हिमाचल पुलिस द्वारा हिमाचल को नशा मुक्त बनाने की मुहिम चलाई जा रही है और आए दिन तस्करों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे डाला जा रहा है।
इसी कड़ी में अब ताजा मामला हिमाचल के कांगड़ा जिले से सामने आया है- जहां पर डमटाल पुलिस ने एक महिला नशा तस्कर को उसके घर से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस टीम ने महिला से चिट्टे की खेप भी बरामद की है।
मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस टीम को ये सफलता छापेमारी के दौरान मिली है। पुलिस टीम ने बीते कल डमटाल में एक घर पर छापा मारा। जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
घर की तलाशी के दौरान पुलिस टीम ने मौके पर मौजूद महिला से 12.98 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद की। इसके बाद पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए खेप को अपने कब्जे में लेकर महिला को अरेस्ट कर लिया।
जांच में पाया गया कि आरोपी महिला आशा और उसका पति मथुन उर्फ चापड़ दोनों ही आदतन अपराधी हैं। दोनों पर पहले से नशा तस्करी के मामले दर्ज हैं। अकेले आशा पर ही पहले से नशा तस्करी से जुड़े दो केस डमटाल थाने में दर्ज हैं। साल 2020 में कोविड के समय मथुन से 11.53 ग्राम हेरोइन और साल 2022 में 4.63 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी।
आशा के पति मथुन का अपराधिक रिकॉर्ड आशा से भी ज्यादा है। मथुन के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत 11 मामले दर्ज हैं- जो कि मामून थाने, डमटाल और पठानकोट के डिवीजन नंबर 2 में दर्ज हैं। इसके अलावा उस पर मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने का भी आरोप है।
मामले की पुष्टि करते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस टीम ने आशा के खिलाफ मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस टीम द्वारा दोनों पति-पत्नी के नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है। पुलिस पता लगाने में जुटी हुई है कि वो ये खेप कहां से लाते थे और आगे किस-किसको बेचते थे।
गौरतलब है कि, हिमाचल प्रदेश में नशे का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है, जो अब महज एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक संकट का रूप ले चुका है। राज्य के शहरी से लेकर ग्रामीण इलाकों तक ड्रग्स की पहुंच हो चुकी है। चिंता की बात यह है कि अब इस काले कारोबार में महिलाएं भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, महिला तस्करों की संलिप्तता खासकर सीमावर्ती जिलों जैसे कांगड़ा, सोलन और ऊना में बढ़ी है। इन महिलाओं को पुलिस की नजर से बचने के लिए इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब वे खुद नेटवर्क का हिस्सा बन चुकी हैं। कई मामलों में महिलाएं अपने घरों से ही चिट्टा और अन्य नशीले पदार्थ बेचती पाई गई हैं।