#अपराध
August 2, 2026
हिमाचल : युवक को चरस तस्करी पड़ी भारी, कोर्ट ने सुनाई कठोर सजा- अब जेल में कटेगी उम्र
चरस तस्करी मामले में अदालत का सख्त फैसला
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच शिमला की अदालत ने एक महत्वपूर्ण मामले में सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने 5.5 किलोग्राम चरस की तस्करी के मामले में दोषी पाए गए आरोपी को 12 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अगर आरोपी निर्धारित समय में जुर्माना जमा नहीं करता है तो उसे तीन वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
यह मामला 24 अक्तूबर, 2024 का है, जब शिमला जिले के चिड़गांव पुलिस थाना क्षेत्र में पुलिस नियमित गश्त और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही थी। इसी दौरान पुलिस को एक व्यक्ति की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। पूछताछ और तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 5.5 किलोग्राम चरस बरामद हुई।
बरामद की गई चरस की मात्रा व्यावसायिक श्रेणी में आने के कारण पुलिस ने तत्काल आरोपी को हिरासत में ले लिया। साथ ही उसके खिलाफ NDPS अधिनियम की धारा 20 और 29 के तहत मामला दर्ज कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मामले की हर पहलू से जांच की। बरामदगी से जुड़े सभी वैज्ञानिक और कानूनी साक्ष्य एकत्र किए गए तथा गवाहों के बयान दर्ज किए गए। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने मजबूत साक्ष्यों के आधार पर अदालत में आरोप पत्र (चालान) प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-1, शिमला की अदालत में चली, जहां अभियोजन पक्ष ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से अदालत के समक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों का गहन परीक्षण किया। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित होते हैं।
इसके आधार पर अदालत ने 57 वर्षीय सोहन दास, निवासी उत्तरकाशी (उत्तराखंड) को मादक पदार्थों की तस्करी का दोषी करार देते हुए 12 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को तीन वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
अदालत के इस फैसले को नशे के कारोबार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विदित रहे कि, प्रदेश में लगातार बढ़ती नशा तस्करी की घटनाओं के बीच इस तरह के फैसले कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए चेतावनी के रूप में देखे जा रहे हैं।
फैसले के बाद शिमला पुलिस ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ उसका अभियान लगातार जारी रहेगा। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि युवाओं के भविष्य को नशे की लत में धकेलने वाले तस्करों के खिलाफ किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाएगी। पुलिस 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के तहत कार्रवाई कर रही है और भविष्य में भी नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि अगर उनके आसपास किसी प्रकार की नशा तस्करी या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी हो तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। जनसहयोग और सतर्कता के माध्यम से ही समाज को नशामुक्त बनाने के अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।