#अपराध
October 21, 2025
हिमाचल: 28 वर्षीय युवक ने पुल से लगा दी थी छलांग, नदी में तैरती मिली देह
लोगों ने रावी नदी में तैरती देखी देह, पुलिस को किया सूचित
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चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक 28 साल के युवक की लाश रावी नदी में तैरती हुई मिली है। नदी में शव होने की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आगामी जांच शुरू कर दी है। मृतक युवक जम्मू कश्मीर के डोडा का रहने वाला बताया जा रहा है। इस युवक ने कुछ दिन पहले ही बालू पुल से छलांग लगा दी थी और तब से लापता था।
मिली जानकारी के अनुसार आज मंगलवार को चंबा जिला में राजपुरा क्षेत्र स्थित रावी नदी में युवक के शव होने की सूचना पुलिस को मिली। मृतक युवक की पहचान 28 वर्षीय मुनीव अहमद पुत्र मोहम्मद शरीफ निवासी गांव टेंडला तहसील चिल्ली पिंगल जिला डोडा जम्मू.कश्मीर के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि युवक ने कुछ दिन पहले बालू पुल से नदी में छलांग लगाई थी और तब से लापता था।
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चंबा सदर थाना को सुबह दूरभाष के माध्यम से सूचना मिली कि राजपुरा इलाके में रावी नदी के किनारे एक शव तैरता दिखाई दिया है। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर मेडिकल कॉलेज चंबा के शवगृह में भेजा गया। साथ ही आसपास के पुलिस थानों व चौकियों को गुमशुदा व्यक्तियों की जानकारी के लिए सूचित किया गया।
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शव की पहचान मुनीव अहमद के भाई मोहम्मद अयाज ने की, जो चंबा पहुंचा था। अयाज ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उसका भाई पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान था और चंबा में मजदूरी का काम कर रहा था। कुछ दिन पहले उसने बालू पुल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। परिजन उसे तब से ढूंढ रहे थे, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।
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चंबा सदर थाना प्रभारी संदीप कुमार ने जानकारी दी कि शव का मेडिकल कॉलेज चम्बा में पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है। हालांकि, परिजनों ने किसी भी तरह की साजिश या हत्या की आशंका से इनकार किया है।
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मुनीव अहमद की आत्महत्या एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या हम मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों को समय रहते पहचान पा रहे हैं। क्या काम के दबाव, अकेलापन और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहे लोगों को पर्याप्त मनोवैज्ञानिक सहयोग मिल रहा है। मुनीव की मौत के बाद न सिर्फ उनका परिवार शोक में है, बल्कि यह खबर हर संवेदनशील व्यक्ति को सोचने पर मजबूर करती है कि कहीं हमारे आसपास कोई और भी ऐसी ही पीड़ा से गुजर रहा तो नहीं।