#अव्यवस्था
December 23, 2025
सुक्खू सरकार का अनोखा परिसीमन : 100 मीटर की पंचायत छोड़ 6 KM दूर जोड़ा, भड़के लोग
प्रशासन पर लगाया एकतरफा फैसला लेने का आरोप
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ऊना। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनाव के मद्देनजर कुछ जिलों में पंचायत परिसीमन किया जा रहा है। मगर इस बीच प्रदेश के ऊना जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां बंगाणा उपमंडल में पंचायत परिसीमन को लेकर सुक्खू सरकार के फैसले पर विरोध तेज हो गया है।
ग्राम पंचायत बल्ह के गांव सन्हाल परनोलियां को महज 100 मीटर दूर स्थित पंचायत से हटाकर 6 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत टिहरा में शामिल करने के निर्णय से ग्रामीण भड़क गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत बदलने से उनकी रोजमर्रा की समस्याएं बढ़ जाएंगी। लोगों का कहना है कि बिना जनपरामर्श लिया गया यह फैसला विकास कार्यों और रोजमर्रा की सुविधाओं को प्रभावित करेगा। मौजूदा पंचायत कार्यालय गांव से बेहद नजदीक है, जबकि प्रस्तावित नई पंचायत काफी दूर स्थित है।
इससे ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे समय के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ेगा। इसी निर्णय के विरोध में मंगलवार को जिला परिषद सदस्य कृष्ण पाल शर्मा और ग्राम पंचायत बल्ह की प्रधान उषा ठाकुर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण उपायुक्त कार्यालय पहुंचे।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
जिला परिषद सदस्य कृष्ण पाल शर्मा ने बताया कि गांव सन्हाल परनोलियां जिस पंचायत में वर्तमान में शामिल है, उसका पंचायत घर महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होती। इसके विपरीत, ग्राम पंचायत टिहरा का पंचायत कार्यालय लगभग 6 किलोमीटर दूर है, जिससे ग्रामीणों को हर सरकारी कार्य के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।
ग्राम पंचायत प्रधान उषा ठाकुर ने प्रशासन पर एकतरफा फैसला लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि न तो पंचायत प्रतिनिधियों से राय ली गई और न ही गांव के लोगों से कोई चर्चा की गई। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम पंचायत बल्ह पहले से ही आकार में छोटी पंचायत है, जबकि पंचायत टिहरा काफी बड़ी है।
ऐसे में सन्हाल परनोलियां गांव को वहां जोड़ने से विकास कार्य प्रभावित होने की पूरी आशंका है। ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि गांव को मौजूदा पंचायत से अलग करने का निर्णय तुरंत रद्द किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।