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April 22, 2026

हिमाचल: बीपी, शुगर सहित इन दवाओं को खाने वाले हो जाएं सावधान, 141 के सैंपल हुए फेल

बीपी.शुगर ही नहीं, कैंसर और हार्ट की दवाएं भी फेल

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himachal drug alert

शिमला/सोलन। हिमाचल प्रदेश में आम से लेकर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह खबर खतरे की घंटी के समान है। हिमाचल प्रदेश की 46 दवाआंे सहित देश भर की 141 दवाओं के सैंपल फेल हो गए हैं। जिससे फार्मा सेक्टर में हड़कंप मच गया है। बड़ी बात यह है कि इसमें बीपी शुगर बुखार सहित कैंसर और दिल की गंभीर बीमारियों की दवाएं भी शामिल हैं। एक साथ इतनी दवाओं के सैंपल फेल होने पर फार्मा सेक्टर इस समय बड़े सवालों के घेरे में है।

 

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ताज़ा जांच में देशभर की 141 दवाओं के सैंपल ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ (NSQ) पाए गए हैं। इनमें 46 दवाएं हिमाचल के बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, कालाअंब, ऊना, सोलन और पांवटा साहिब जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बनी बताई गई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि फेल हुई दवाओं में सिर्फ सामान्य बुखार या दर्द की नहीं, बल्कि बीपी, शुगर, अल्सर, संक्रमण, यहां तक कि कैंसर और हार्ट रोग में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी शामिल हैं। ऐसे में इन दवाओं का उपयोग करने वाले मरीजों के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है।

 

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स्वास्थ्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल

सैंपल फेल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और ड्रग कंट्रोलर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। कई दवाएं हाल के बैच की बताई जा रही हैं, जिससे गुणवत्ता निगरानी की प्रक्रिया पर भी चिंता बढ़ी है। हालांकि विभाग का कहना है कि रेंडम सैंपलिंग के तहत जांच की जाती है और रिपोर्ट फेल आने पर संबंधित बैच का पूरा स्टॉक बाजार से वापस मंगवाया जाता है।

कंपनियों पर कार्रवाई, लाइसेंस हो सकता है रद्द

ड्रग कंट्रोलर विभाग ने संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर दिए हैं। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत लाइसेंस निलंबन/रद्द करने और जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई भी संभव है। विभाग ने साफ किया है कि दवा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना पूरी तरह निर्माता की जिम्मेदारी है।

 

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ट्रायल और निर्यात पर कड़ी निगरानी

इसी बीच केंद्र ने दवा उद्योग के लिए क्लीनिकल ट्रायल और निर्यात से जुड़े नियम सख्त कर दिए हैं। अब फॉर्म CT-05 के तहत कुछ आवेदनों से पहले उद्योगों को पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। एथिक्स कमेटी की मंजूरी और न्यूनतम 18 स्वयंसेवकों की शर्त भी लागू की गई है। यह नियम 21 अप्रैल से प्रभावी हो चुके हैं और हिमाचल के फार्मा हब पर भी लागू होंगे।

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सावधान रहें मरीज

विशेषज्ञों का कहना है कि मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें और संदिग्ध दवाओं से बचें। यदि किसी दवा को लेकर शंका हो, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श करें।

 

हिमाचल में बनी इन दवाओं के सैंपल हुए फेल

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