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April 29, 2026

हिमाचल में मुफ्त इलाज का दावा फेल : आयुष्मान कार्ड में घपला, अपनी जेब से पैसे चुका रहे मरीज

दिल की मरीज महिला को सरकारी अस्पताल में नहीं मिला मुफ्त इलाज

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शिमला। हिमाचल प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। जिसमें एक बुजुर्ग दंपत्ति को आयुष्मान योजना के बावजूद भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ा।

महिला को लगना था पेसमेकर

मामला चमियाणा स्थित अस्पताल का है, जहां एक व्यक्ति अपनी पत्नी को इलाज के लिए लेकर पहुंचा था। महिला मरीज का उपचार कार्डियोलॉजी विभाग में चल रहा था और जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे पेसमेकर लगाने की सलाह दी।

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आयुष्मान कार्ड पर नहीं मिला पेसमेकर

परिवार के पास आयुष्मान कार्ड भी था और उसे अस्पताल में विधिवत पंजीकृत भी कराया गया। मगर जब पेसमेकर की जरूरत पड़ी तो संबंधित कंपनी ने इसे देने से साफ मना कर दिया।

मजबूरी में खरीदना पड़ा पेसमेकर

बताया गया कि सरकार की ओर से आयुष्मान और हिमकेयर योजनाओं के तहत लंबित भुगतान अभी तक जारी नहीं हुआ है। जिसके चलते कंपनी उपकरण उपलब्ध नहीं करा रही। ऐसे में मरीज के परिजनों को मजबूरी में अपनी जेब से ही पेसमेकर खरीदना पड़ा।

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मरीज को नहीं मिला सुविधा का लाभ

पीड़ित परिवार का आरोप है कि आयुष्मान योजना के तहत सालाना पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलने का दावा किया जाता है। मगर उन्हें इस सुविधा का लाभ नहीं मिला।

मरीज को हुई कई दिक्कतें

उनका कहना है कि अस्पताल की ओर से सिर्फ करीब 13 हजार रुपये की दवाएं दी गईं, वह भी डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं के बजाय अन्य विकल्प थमा दिए गए। इससे मरीज के स्वास्थ्य में सुधार आने में देरी हुई और घाव भरने में भी ज्यादा समय लगा।

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अस्पताल में बना झूठा बिल

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि बाद में उनसे कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाने का प्रयास किया गया। जिनमें यह दिखाया जा रहा था कि 75 हजार रुपये का इलाज आयुष्मान योजना के तहत किया जा चुका है। जबकि हकीकत में उन्होंने खुद भुगतान किया था।

महिला के पति ने बताया सच

महिला के पति चानन सिंह रांगटा के अनुसार, उन्हें पेसमेकर के तीन विकल्प बताए गए थे- एक करीब 75 हजार रुपये का, दूसरा लगभग 1.10 लाख रुपये का जिसमें दस साल की गारंटी बताई गई और तीसरा करीब 1.50 लाख रुपये का, जिसे जीवनभर की गारंटी के साथ बताया गया।

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डॉक्टर अपनी मर्जी से ले रहे फैसले

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में आयुष्मान योजना से जुड़े कर्मचारी मरीज और डॉक्टर की सलाह को नजरअंदाज कर अपनी मर्जी से फैसले ले रहे हैं। डॉक्टर द्वारा लिखी गई ब्रांडेड दवाओं की जगह अन्य कंपनियों की दवाएं दी गईं, जिससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हुई।

मामले की जांच शुरू 

इस पूरे मामले की लिखित शिकायत अस्पताल प्रशासन को सौंप दी गई है। वहीं, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुधीर ने पुष्टि की है कि शिकायत प्राप्त हुई है और इसकी जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि संबंधित कर्मचारियों से जवाब तलब किया गया है और जांच के आधार पर ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।

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