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April 22, 2026

हिमाचल में बच्चों को नहीं मिल रहा मिड डे मील, स्कूल के लिए शिक्षक घर से ढो रहे सिलेंडर

हिमाचल में गहराया LPG संकट...लोग परेशाान

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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्कूली बच्चों के पोषण से जुड़ी मिड डे मील योजना इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है। प्राथमिक स्कूलों में LPG सिलेंडर की भारी कमी के चलते बच्चों के लिए बनने वाला भोजन प्रभावित हो रहा है- जिससे शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य पर भी चिंता गहराने लगी है।

हिमाचल स्कूलों में गैस का संकट

खंड कुल्लू-1 के करीब 30 से अधिक प्राथमिक विद्यालय इस समस्या से जूझ रहे हैं। कई स्कूलों में हालात इतने खराब हो गए हैं कि अध्यापकों को अपने घरों से गैस सिलेंडर लाकर किसी तरह मिड डे मील की व्यवस्था करनी पड़ रही है।

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समय पर नहीं बन पा रहा खाना

इसके बावजूद कई स्थानों पर समय पर खाना नहीं बन पा रहा- जिससे बच्चों को इंतजार करना पड़ता है और पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ (PTF) कुल्लू-1 के पदाधिकारियों ने बताया कि यह समस्या पिछले कई दिनों से लगातार बनी हुई है।

 

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दिन-ब-दिन बिगड़ रही हालत

उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित गैस एजेंसियों को बार-बार सूचित करने के बावजूद 5-6 दिन बीत जाने पर भी कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। इससे स्कूलों में स्थिति दिन-ब-दिन और बिगड़ती जा रही है।

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मिड डे मील की योजना ठप

शिक्षक संघ ने इसे गंभीर लापरवाही करार देते हुए प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। मंगलवार को संघ के प्रतिनिधियों ने उपायुक्त कुल्लू और जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक से मुलाकात कर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गैस सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो मिड डे मील योजना पूरी तरह ठप हो सकती है।

 

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बच्चों के स्वास्थय पर असर

मिड डे मील योजना बच्चों के पोषण और स्कूल में उनकी नियमित उपस्थिति बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में इसका प्रभावित होना न केवल बच्चों के स्वास्थ्य पर असर डालेगा, बल्कि स्कूलों में उनकी उपस्थिति भी घट सकती है।

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अभिभावकों की बढ़ी चिंता

स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। अभिभावकों और शिक्षकों दोनों की चिंता बढ़ रही है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ- तो छोटे बच्चों की पढ़ाई और पोषण दोनों पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। शिक्षक संघ ने प्रशासन से अपील की है कि इस समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल कर बच्चों के भविष्य से जुड़ी इस योजना को सुचारू रूप से चलाया जाए।

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