#अव्यवस्था
February 8, 2026
HRTC कर्मचारी परेशान : रिटायरमेंट के बाद नहीं मिल रही पेंशन, विधानसभा का करेंगे घेराव
पेंशन ना मिलने से HRTC कर्मचारी बेहद परेशान हैं
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ऊना। हिमाचल प्रदेश में पेंशनर्स से जुड़े मसले एक बार फिर सरकार के लिए गंभीर चुनौती बनते नजर आ रहे हैं। HRTC से सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने समय पर पेंशन न मिलने, लंबित मांगों और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई है।
बुजुर्ग पेंशनर्स का कहना है कि जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें संघर्ष नहीं, बल्कि सम्मान, स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था उन्हें बार-बार आंदोलन के लिए मजबूर कर रही है।
शनिवार को ऊना जिला मुख्यालय के पुराने बस अड्डा परिसर में हिमाचल पथ परिवहन निगम सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण संगठन की ओर से बैठक आयोजित की गई। बैठक के बाद पेंशनर्स ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए समय पर पेंशन जारी न होने पर रोष प्रकट किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में बुजुर्ग पेंशनर्स शामिल हुए, जिनमें कई सहारे के लिए लाठी के साथ पहुंचे थे।
संगठन के अध्यक्ष किशोरी लाल ने कहा कि वर्तमान में सरकार पेंशन का भुगतान चार अलग-अलग आयु वर्गों में विभाजित करके कर रही है- 75 वर्ष, 65 वर्ष, 63 वर्ष और 58 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनर्स के लिए अलग-अलग तिथियों पर पेंशन जारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से पेंशनर्स के बीच असमानता की भावना पैदा हो रही है और बुजुर्गों को यह समझ ही नहीं आता कि उन्हें पेंशन कब मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट मांग रखी कि सभी पेंशनर्स को एक साथ और एकमुश्त पेंशन जारी की जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक मानसिक तनाव से मुक्ति मिल सके।
किशोरी लाल ने आरोप लगाया कि एचआरटीसी के विभिन्न कार्यालयों में पेंशनर्स के मेडिकल रिइम्बर्समेंट और अन्य प्रतिपूर्ति बिल लंबे समय से लंबित पड़े हैं। कई बुजुर्ग पेंशनर्स गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और इलाज पर भारी खर्च कर चुके हैं।
मगर समय पर भुगतान न होने से उन्हें कर्ज लेने या पारिवारिक सहयोग पर निर्भर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी इस संवेदनशील मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रहे, जिससे पेंशनर्स की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
पेंशनर्स ने यह भी सवाल उठाया कि जब निगम में कार्यरत कर्मचारियों को सरकार द्वारा तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जा चुका है, तो पेंशनर्स को इससे क्यों वंचित रखा गया है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में पेंशनर्स की आय सीमित है और डीए न मिलने से उनका जीवन यापन और कठिन हो गया है। इससे पेंशनर्स खुद को सरकार द्वारा उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
पेंशनर्स ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि उनकी पेंशन हर माह की पहली तारीख को नियमित रूप से जारी नहीं की गई और लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो सेवानिवृत्त कर्मचारियों की संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
पेंशनर्स ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह उन्हें महीने के अंत में किश्तों में पेंशन मिलती है, उसी तरह मंत्री और विधायक भी अपनी सैलरी किश्तों में लेकर देखें, तब उन्हें बुजुर्गों की पीड़ा का अहसास होगा।
प्रदर्शन के दौरान पेंशनर्स ने सरकार से अपील की कि उनके मामलों को केवल आंकड़ों और फाइलों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए तत्काल समाधान किया जाए। उनका कहना है कि उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा निगम की सेवा में बिताया है और अब बुढ़ापे में उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए।