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October 6, 2026
हिमाचल में मौसम का डबल अटैक: ओलावृष्टि ने मचाई तबाही, 10 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट
तेज बारिश और ओलावृष्टि ने तबाह कर दी किसानों की फसलें
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट बदल ली है। भारी बारिश के अलर्ट के बीच किन्नौर जिला में ओलावृष्टि ने जमकर तबाही मचाई है। मंगलवार शाम अचानक बदले मौसम ने किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी। निचार विकासखंड की कई पंचायतों में तेज बारिश के साथ इतनी जोरदार ओलावृष्टि हुई कि खेतों में तैयार होने की कगार पर पहुंची फसलें देखते ही देखते जमीन पर बिछ गईं।
उधर, प्रदेश में मौसम विभाग ने अगले 12 घंटों के लिए 10 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। चंबा, कांगड़ा, मंडी, ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, सोलन, सिरमौर, शिमला और कुल्लू में तेज बारिश के साथ कुछ इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। ऐसे में प्रदेश के किसानों, बागवानों और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है।
हिमाचल प्रदेश में मंगलवार को मौसम ने अचानक करवट ली। सुबह से आसमान में बादल छाए रहे और दोपहर बाद कई क्षेत्रों में बारिश का दौर शुरू हो गया। धर्मशाला, पालमपुर, चंबा और मनाली में झमाझम बारिश हुई, जबकि पालमपुर में 68 मिलीमीटर बारिश के साथ ओलावृष्टि भी दर्ज की गई। वहीं, लाहौल-स्पीति, पांगी और कुल्लू के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम का असर और ज्यादा देखने को मिला। रोहतांग दर्रा सहित पीर पंजाल की सेवन सिस्टर पीक, घेपंक पीक, ड्रलबू चोटी और जंस्कार रेंज पर बर्फबारी हुई। लाहौल-स्पीति और पांगी के ऊंचे क्षेत्रों में करीब 10.16 सेंटीमीटर तक बर्फ दर्ज की गई। केलांग में भी दोपहर बाद तेज हवाओं के साथ बारिश होने से तापमान में गिरावट आई और पहाड़ी इलाकों में ठंड बढ़ गई।
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मंगलवार शाम करीब पांच बजे निचार विकासखंड की कई पंचायतों में मौसम अचानक बिगड़ गया। पहले तेज बारिश शुरू हुई और इसके बाद बड़े पैमाने पर ओलावृष्टि होने लगी। कुछ ही देर में खेतों में ओलों की सफेद परत दिखाई देने लगी। तेज ओलावृष्टि की मार इतनी ज्यादा थी कि कई जगह खेतों में खड़ी फसलें टूटकर जमीन पर गिर गईं। किसानों के मुताबिक इस समय धान, मक्की, दालें और अन्य फसलें तैयार होने के चरण में थीं। ऐसे समय पर हुई ओलावृष्टि से फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
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ओलावृष्टि से धान, तुलसी, दालें, कोदरा, मक्की, बिथु और कांवडी समेत कई फसलों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। किसानों का कहना है कि उन्होंने कई महीनों तक मेहनत करके फसलों को तैयार किया था। फसल कटाई के करीब पहुंची ही थी कि अचानक मौसम ने ऐसा रुख बदला कि खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं। कई खेतों में पौधे टूटकर जमीन पर गिर गए हैं। ऐसे में किसानों को उत्पादन कम होने के साथ आर्थिक नुकसान की भी चिंता सताने लगी है।
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किन्नौर की चोरा पंचायत में भी शाम के समय भारी ओलावृष्टि हुई। यहां ओलों की मार का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पेड़-पौधों को भी नुकसान पहुंचा। तेज ओलावृष्टि के कारण कई पेड़ों की पत्तियां और छोटी टहनियां टूटकर जमीन पर गिर गईं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से प्रभावित इलाकों का जल्द निरीक्षण करवाने और फसलों व बागवानी को हुए नुकसान का आकलन करने की मांग उठाई है।
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मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के मुताबिक प्रदेश में अगले कई दिनों तक मौसम का मिजाज पूरी तरह साफ रहने वाला नहीं है। 6 से 9 अक्तूबर के बीच कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी होने की संभावना है। 10 अक्तूबर को मैदानी और कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी बारिश हो सकती है, जबकि 11 और 12 अक्तूबर को प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान है। इस दौरान कुछ क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने को लेकर येलो अलर्ट भी जारी किया गया है।
उधर, प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी मौसम ने अपना असर दिखाया। मनाली और पालमपुर में मंगलवार को झमाझम बारिश हुई। पालमपुर में दोपहर के समय करीब 68 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं मनाली में दोपहर करीब दो बजे शुरू हुई बारिश शाम साढ़े छह बजे तक जारी रही। बारिश के कारण कई क्षेत्रों में तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई और ऊंचे इलाकों में ठंड का असर बढ़ने लगा है।
मौसम विभाग ने ताजा चेतावनी जारी करते हुए प्रदेश के 10 जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है। यह चेतावनी चंबा, कांगड़ा, मंडी, ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, सोलन, सिरमौर, शिमला और कुल्लू के लिए जारी की गई है। इन क्षेत्रों में अगले 12 घंटे के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही कुछ स्थानों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं और तूफानी मौसम बनने की भी संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
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मंगलवार को कई हिस्सों में बारिश के बाद प्रदेश के औसत अधिकतम तापमान में करीब एक डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। कल्पा में तापमान में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज हुई। धर्मशाला और शिमला में भी अधिकतम तापमान नीचे आया है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले चार दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान 2 से 3 डिग्री और अधिकतम तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। इससे खासकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सुबह और रात के समय ठंड बढ़ने की संभावना है।
एक तरफ प्रदेश में भारी बारिश और ऊंचे क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है, वहीं दूसरी ओर किन्नौर में ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। फसल कटाई से ठीक पहले मौसम के बिगड़े मिजाज ने किसानों की मेहनत पर असर डाला है। अब प्रभावित किसान प्रशासन की टीमों के मौके पर पहुंचने और नुकसान का आकलन होने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं अगले 12 घंटे के लिए जारी ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए प्रदेश में लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।