#अव्यवस्था
November 29, 2025
कर्ज से ही चलेगा हिमाचल! सुक्खू सरकार ने फिर उठाया 350 करोड़ का नया बोझ
राजस्व घाटा अनुदान कम होने से बढ़ी चुनौती
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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार एक बार फिर वित्तीय संकट से निपटने के लिए कर्ज लेने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने इस बार 350 करोड़ रुपये का नया लोन लेने का निर्णय लिया है।
वित्त विभाग ने इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके अनुसार यह राशि 2 दिसंबर को आरबीआई की नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से जुटाई जाएगी। सरकार को यह धनराशि 3 दिसंबर तक प्राप्त हो जाएगी। यह कर्ज एक मीडियम टर्म लोन (MTL) के रूप में लिया जाएगा।
इसके लिए हिमाचल सरकार ने केंद्र सरकार से मंजूरी पहले ही प्राप्त कर ली है। अधिकारियों के अनुसार, यह ऋण राज्य के नियमित खर्चों जैसे वेतन, पेंशन, सरकारी योजनाओं और दैनिक संचालन को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक है।
इस वर्ष केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को सबसे कम राजस्व घाटा अनुदान मिलने के बाद राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ गया है। इसी वजह से सुक्खू सरकार को महीने-दर-महीने शॉर्ट टर्म और मीडियम टर्म लोन लेकर खजाने की जरूरतों को पूरा करना पड़ रहा है।
राज्य सरकार के वित्तीय आंकड़े बताते हैं कि केवल वेतन और पेंशन के भुगतान पर ही हर महीने करीब 2000 करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं। राज्य की अपनी आय सीमित है, ऐसे में सरकारी तंत्र को चलाने के लिए कर्ज लेना मजबूरी बन गया है।
दिसंबर तक सरकार की योजना इसी मॉडल पर कर्ज लेकर काम चलाने की है। इसके बाद जनवरी से मार्च की अंतिम तिमाही के लिए केंद्र सरकार से एक नई लोन लिमिट मिलने की संभावना है, जिससे अगले तीन महीनों का वित्तीय प्रबंधन कुछ आसान हो सकता है।
1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष से हिमाचल सरकार को राहत की उम्मीद है। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू होंगी, और सरकार को भरोसा है कि राजस्व घाटा अनुदान में और कटौती नहीं की जाएगी।
गौरतलब है कि राज्य सरकार इससे पहले भी हाल ही में 300 करोड़ रुपये का कर्ज उठा चुकी है। लगातार कर्ज लेने से हिमाचल का ऋण बोझ बढ़ता जा रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में यह सरकार के पास मौजूद सबसे बड़ा विकल्प बन गया है।