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May 20, 2025
हिमाचल: इस स्कूल में 10वीं के सभी छात्र फेल, सरकार नहीं दे पाई शिक्षक; बच्चों ने भुगता खामियाजा
शिक्षा मंत्री के गांव और गोद लिए स्कूल का भी बुरा हाल
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शिमला/सिरमौर। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों की शिक्षा की हकीकत एक बार फिर बेनकाब हो गई है। जहां एक ओर प्रदेश सरकार स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हालात बेहद चिंताजनक हैं। सिरमौर से लेकर शिमला तक कई स्कूलों में छात्र शत.प्रतिशत फेल हुए हैं, और इसके पीछे एक नहीं, कई गंभीर कारण हैं। जिसमें शिक्षकों की कमी, आधारभूत सुविधाओं की बदहाली और सरकार की उदासीनता एक अहम कारण है।
सिरमौर जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय चारना में 10वीं कक्षा के सभी 21 छात्र फेल हो गए। इनमें से तीन को कंपार्टमेंट मिली है, लेकिन कोई भी छात्र पास नहीं हो सका। स्कूल प्रबंधन समिति का कहना है कि स्कूल में न प्रिंसिपल है, न गणित, विज्ञान, कंप्यूटर और पीटी शिक्षक। ये सभी पद 2023 से खाली पड़े हैं। एसएमसी अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह वर्मा के अनुसार, बार.बार गुहार लगाने के बावजूद भी सरकार ने इस स्कूल को शिक्षक नहीं दिए। जिसका नतीजा 21 छात्रों को अपना एक साल बर्बाद करके चुकाना पड़ा है।
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चारना स्कूल में 12वीं का परिणाम भी निराशाजनक रहा है। 12वीं कक्षा में 16 छात्रों में से 6 छात्र फेल हुए हैं। इस नतीजे से अभिभावक इतने नाराज़ हैं कि वे अपने बच्चों को स्कूल से निकालने की योजना बना रहे हैं। हाल ही में हुई एक अभिभावक बैठक में अधिकांश लोग बच्चों का नाम कटवाने पर सहमत दिखे।
चारना स्कूल की इमारत की हालत भी इतनी दयनीय है कि यहां बारिश के दौरान छात्रों का क्लासरूम में बैठना भी मुश्किल हो जाता है। टपकती छतें और टूटी दीवारें शिक्षा के अधिकार को शर्मसार कर रही हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के गृह क्षेत्र शिमला जिले के पौटा ;धारद्ध में स्थित स्कूल में भी 10वीं के सभी 6 छात्र फेल हो गए हैं। स्कूल प्रबंधन के अनुसार गणित का शिक्षक बीते दो वर्षों से स्टडी लीव पर है और उसकी जगह किसी को नहीं भेजा गया। यही नहीं शिक्षा मंत्री द्वारा गोद लिया गया जुब्बल स्कूल भी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाया। इस स्कूल 20 छात्रों में से 10 छात्र फेल हुए हैं।
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लाहौल-स्पीति के सलग्रां स्कूल में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां 12वीं कक्षा के केवल 3 छात्र थे, लेकिन इन तीन छात्रों के लिए यहां चार शिक्षक तैनात थे, बावजूद इसके सभी छात्र फेल हो गए। यह उदाहरण दर्शाता है कि केवल शिक्षक की उपस्थिति ही नहीं, पढ़ाई की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है।