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June 20, 2026

हिमाचल में 64 हजार बच्चों ने छोड़ी पढ़ाई- लड़कियों का आंकड़ा अधिक, शिक्षा विभाग की बढ़ी चिंता

परिवार की आर्थिक मदद के लिए कामकाज में लगना प्रमुख कारण

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School Dropout

शिमला। हिमाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था देशभर में बेहतर मानी जाती है, लेकिन हाल ही में सामने आए आंकड़ों ने शिक्षा विभाग की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 64 हजार से अधिक किशोर-किशोरियां स्कूल शिक्षा से बाहर हो चुके हैं। इनमें लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में ज्यादा है, जो सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों की ओर इशारा करती है।

विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखना बड़ी चुनौती

मिली जानकारी के अनुसार, हाल ही में आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक में सामने आया कि प्रदेश में कुल 64,055 बच्चे स्कूलों से बाहर हैं, जिनमें 29,795 लड़के और 34,260 लड़कियां शामिल हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

 

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विशेषज्ञों का मानना है कि कई छात्र नौवीं-दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं, जबकि कुछ 12वीं के बाद आगे शिक्षा जारी नहीं रख पाते। लड़कों के मामले में परिवार की आर्थिक मदद के लिए कामकाज में लग जाना प्रमुख कारण माना जा रहा है। वहीं लड़कियों के स्कूल छोड़ने के पीछे घरेलू जिम्मेदारियां, आर्थिक दबाव और कई क्षेत्रों में शिक्षा को लेकर जागरूकता की कमी जैसी समस्याएं सामने आई हैं।

सरकार और शिक्षा विभाग के लिए बड़ी चुनौती

हालांकि शिक्षा के बुनियादी ढांचे में हिमाचल ने उल्लेखनीय सुधार किए हैं। प्रदेश में अब शून्य नामांकन वाले स्कूल समाप्त किए जा चुके हैं और एकल शिक्षक विद्यालयों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद किशोर आयु वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखना सरकार और शिक्षा विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

 

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बैठक में यह भी बताया गया कि अन्य कई राज्यों की तुलना में हिमाचल की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन प्रदेश को ड्रॉपआउट दर कम करने के लिए विशेष रणनीति अपनानी होगी। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को अतिरिक्त सहायता, करियर मार्गदर्शन और छात्रवृत्ति योजनाओं से जोड़कर उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में लाया जा सकता है।

विशेष अभियान चलाए जाने की संभावना

सरकार और शिक्षा विभाग अब ऐसे विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें स्कूलों में वापस लाने की योजना पर काम कर रहे हैं। आने वाले समय में इस दिशा में विशेष अभियान चलाए जाने की संभावना है, ताकि प्रदेश के हर बच्चे को शिक्षा का अवसर मिल सके और ड्रॉपआउट की बढ़ती समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।

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