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March 3, 2026

वाह सुक्खू जी, मौज करा दी! मंत्री की बेटी को पहले दिया सेवा विस्तार, अब बनाया प्रिंसिपल

56 अधिकारियों को पदोन्नति, मंत्री की बेटी का नाम भी शामिल

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Health Minister dhaniram shandil Daughter geetanjali Kashyap Promotes extension sukhu government

शिमला। हिमाचल प्रदेश में इन दिनों एक बार फिर सिस्टम बनाम सिफारिश की बहस तेज हो गई है। आरोप लग रहे हैं कि सुक्खू सरकार में नेताओं और मंत्रियों के परिजनों को विशेष लाभ मिल रहे हैं। ताजा मामला स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल की बेटी गीतांजलि कश्यप से जुड़ा है, जिन्हें पहले सेवा विस्तार दिया गया और अब प्रिंसिपल पद पर पदोन्नत कर दिया गया है।

मंत्री की बेटी को बनाया प्रिंसिपल

गीतांजलि कश्यप डाइट सोलन में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत थीं। हाल ही में उन्हें छह माह का सेवा विस्तार दिया गया था। उस समय सरकार की ओर से इसे नियमों के तहत लिया गया निर्णय बताया गया। अब 28 फरवरी को जारी आदेशों में शिक्षा निदेशालय ने 56 प्रवक्ताओं और हेडमास्टरों को पदोन्नत कर प्रिंसिपल बनाया है, जिनमें गीतांजलि कश्यप का नाम भी शामिल है।

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पहले दिया सेवा विस्तार

आदेशों के मुताबिक, इन्हें दिसंबर 2025 से वित्तीय लाभ मिलेगा। हालांकि अभी तक उनके स्थानांतरण को लेकर अलग से आदेश जारी नहीं हुए हैं। बता दें कि इससे पहले गीतांजलि कश्यप ने मीडिया से बातचीत में ये बताया था कि सरकार के पर उनके विषय को पढ़ाने वालों की कमी है, जिस कारण उन्हें सेवा विस्तार दिया जा रहा है। लेकिन सेवा विस्तार के बाद उन्हें प्रिंसिपल पद पर भी तैनाती मिल चुकी है, जो उनके दावों पर भी सवाल उठाता है। 

 

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56 अधिकारियों को किया गया प्रमोट

इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी इसे भाई-भतीजावाद का उदाहरण बता रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि पहले सेवा विस्तार को लेकर सफाई दी गई और अब उसी अधिकारी को प्रमोशन मिल गया। दूसरी ओर सरकार का पक्ष है कि पदोन्नतियां वरिष्ठता और नियमों के आधार पर की गई हैं तथा 56 अधिकारियों को एक साथ प्रमोट किया गया है।

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IGMC प्राचार्य को भी मिला एक्सटेंशन

इसी बीच इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सीता ठाकुर को भी एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया गया है। वे 28 फरवरी को सेवानिवृत्त होने वाली थीं, लेकिन अब 28 फरवरी 2027 तक पद पर बनी रहेंगी।

आर्थिक दबाव के दौर में फैसले पर सवाल

प्रदेश पहले ही आर्थिक दबाव और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में सेवा विस्तार और पदोन्नति जैसे फैसलों को लेकर पारदर्शिता की मांग उठ रही है। विपक्ष सवाल कर रहा है कि क्या सरकार समान अवसर के सिद्धांत पर काम कर रही है या फिर राजनीतिक प्रभाव हावी है।

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