शिमला। हिमाचल प्रदेश की वादियों में सैर.सपाटा करने का सपना देखने वालों को अब जेब ढीली करनी होगी। राज्य सरकार ने आर्थिक संकट से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश में प्रवेश करने वाले वाहनों पर लगने वाली एंट्री फीस में 30 रुपए से 230 रुपए तक की बढ़ोतरी कर दी है। यानी जो शुल्क अब तक लिया जा रहा था, वह अब उससे दोगुना वसूल किया जाएगा। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जो बाहरी राज्यों से हिमाचल घूमने के लिए आते हैं। इसके अलावा सामान लेकर आने वाले वाहनों की एंट्री फीस में भी बेतहाशा बढ़ोतरी की गई है।

कितनी बढ़ी एंट्री फीस

हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने टोल्स एक्ट 1975 के तहत नई दरों की अधिसूचना जारी कर दी है। यह नई दरें पहली अप्रैल 2026 से शुरू होंगी। इसके अनुसार छोटे वाहनों जैसे कार, इनोवा, थार, वैन और हल्के मोटर वाहनों से अब 170 रुपए एंट्री फीस ली जाएगी, जबकि पहले यह 70 रुपए लगती थी। यानी सरकार ने अब 70 से सीधे 170 रुपए बढ़ा दिए हैं।

 

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12 प्लस 1 सीटर वाहन की फीस 130 रुपए

इसी तरह से सरकार ने 12 प्लस 1 सीटर पैसेंजर वाहनों का शुल्क 110 रुपए से बढ़ाकर 130 रुपए कर दिया है। मिनी बस 32 सीटर का शुल्क 180 रुपए से बढ़ाकर 320 रुपए, जबकि कमर्शियल बसों की एंट्री फीस 320 रुपए से बढ़ाकर 600 रुपए कर दी है।

मशीनों की एंट्री फीस में बड़ी बढ़ोतरी

सुक्खू सरकार ने निर्माण कार्य में प्रयोग होने वाली मशीनरी पर लगने वाला शुल्क 570 रुपए से बढ़ाकर 800 रुपए कर दिया है। बड़े मालवाहक वाहनों का शुल्क 720 रुपए से बढ़ाकर 900 रुपए, ट्रैक्टर के प्रवेश शुल्क में भी बढ़ोतरी करते हुए इसे 70 रुपए से 100 रुपए कर दिया गया है, जबकि डबल एक्सल बस.ट्रक की 570 रुपए फीस रखी गई है।

 

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फास्टैग से होगी एंट्री फीस वसूली

प्रदेश सरकार नई टोल बैरियर नीति लागू करने जा रही है, जिसके तहत एंट्री फीस की वसूली सीधे बैरियरों पर की जाएगी और इसके लिए फास्टैग सिस्टम अनिवार्य होगा। यानी अब नकद लेन-देन की जगह डिजिटल माध्यम से शुल्क लिया जाएगा। सरकार ने टोल बैरियरों की नीलामी प्रक्रिया को भी पारदर्शी बनाने का फैसला किया है।

 

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अब सभी बैरियर ऑनलाइन नीलामी के जरिए आवंटित किए जाएंगे। प्रत्येक जिले में उपायुक्त (डीसी) की अध्यक्षता में एक निगरानी कमेटी गठित होगी, जो संचालन, अनुबंध और व्यवस्था पर नजर रखेगी। नीलामी हासिल करने वाले ठेकेदारों को 15 दिनों के भीतर फास्टैग सिस्टम सहित सभी जरूरी तकनीकी प्रबंध लागू करने होंगे। 

क्यों लिया गया फैसला ?

सरकार के सूत्रों के अनुसार केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता में कटौती और बढ़ते कर्ज बोझ ने राज्य की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। विकास परियोजनाओं, कर्मचारियों के वेतन और सामाजिक योजनाओं को जारी रखने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत महसूस की जा रही थी। इसी पृष्ठभूमि में एंट्री फीस बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

 

वर्तमान में पर्यटन हिमाचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। शिमला, मनाली, धर्मशाला और डलहौजी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हर साल भारी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। सरकार का मानना है कि बुनियादी ढांचे के रखरखाव, ट्रैफिक प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी अतिरिक्त फंड की आवश्यकता है।

 

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सरकार का पक्ष

सरकार का दावा है कि बढ़ी हुई फीस से मिलने वाला राजस्व सड़क सुधार, पार्किंग सुविधाओं, सफाई व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण पर खर्च किया जाएगा। साथ ही पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देने का वादा भी किया गया है।

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